श्रीधर तिलवे

कवियो, क्या तुम कविता के धंधे के लिए तैयार हो?

कवियो,
इक्कीसवीं सदी की कवियो

कम से कम एक मिलियन आंखें डिजिटल
पर कविता के लिए अवेलेबल केवल दस

इंटरनेट पर नग्नता सिडक्शन की लाल बाराखडी को स्टैंसिल करते हुए बॉडीफाय हो रही है
कम्यूनिकेशन की battery all time चार्ज हो रही है
इन्फॉर्मेशन को fashion का दर्जा प्राप्त हो रहा है
और हर ऐरा ग़ैरा डिज़ाइन किए हुए कपड़े पहनकर वेबसाइट बना रहा है

इस बेशुमार काल में
कविता के लिबास के नीचे बॉडी ही नहीं बची है
कविता की battery ह्रदय को रीचार्ज नहीं कर रही है
कविता की वेबसाइट पर कोई भी रहने के लिए नहीं आ रहा है

ऐसे समय में, कविता के धंधे के लिए क्या तुम तैयार हो, कवियो?

चेहरे पर मेकअप पोतकर उनका मुखौटा बनाने वाले सौंदर्यशास्त्र आसपास
विशफुल थिंकिंग का सोप ऑपरा पेश करने वाला व्यवहारज्ञान सीधे सांसों में

यह पाइपड्रीम है या पाइपों का बिज़नेस है?
यह टेक का फ्यूचर है या रेवल्यूशन फीचर है?

कंपनियां रिस्क में भकभका रही हैं या फलफला रही हैं?
यह काल के ऊपर आक्षेप है या काल का हस्तक्षेप है?

इंसान को डिजिटल नैरेटिव बनाने वाला यह काल
कलेजे को सोशल मीडिया बनाने वाला यह इंटरनेट का फाल?

कविता का फलकूट लेकर कहां जाओगे कवियो?

जो स्नूज़र वह लूज़र
जो गेट वह ग्रेट

कंप्यूटर के सामने सब समान
कंप्यूटर के सामने सब सामान

साइज़ इर्रेलेवंट होता जा रहा है इस अवकाश में
कविता के फ़ॉर्म पर कौन-सी पर्दाफ़ाश करने वाली
चर्चा कर रहे हो कवियो?

हर जगह रिटर्न मिलने वाले इस काल में
कविता पर वापसी नहीं
दुनिया भर में भागने पर भी
कवौर्टिंग में उसके नाम की दौड़ नहीं

वह चेंज का इवॉल्विंग फ़ोर्स नहीं
वह किसी चीज़ का ओरिजनल सोर्स नहीं

ना बैटर ना चीपर ना फ़ास्टर
ना सेवर ना लीपर ना सर्वर

वह मार्केट में है इतनी इर्रेलेवंट
कि उसे धंधे पर भी नहीं बिठा सकते

वह हमेशा से क़तार में खड़ी है कवियो
बच्चों को जन्म देकर जल रही है उसकी नाभि

वह पाठक में लोप नहीं होगी
वह पाठक ना होने के कारण लोप वाली है

तो
हर सेकंड में दस लाख बादल तैयार करने वाले इस कूल गुबार में
कवियों का कुल
अप्रैल फ़ूल है . . . कवियो



सब अपनी मौत मरते हैं, मैं तेरी मौत मरा

हज़ारों मील दूर रहने वाली तुम्हारे प्रेयसीय अस्तित्व की
यह दिवालिया हरी काई
यहां जम गई है मेरे कमरे में

तुमने पेड़ नहीं लगाए
पर शिशिर छोड़कर चली गई हो

यह पतझर ही शिल्प बीटते-बीटते यहां धड़क रहा है दिल में
आंखों के तारे अंगूठे के पत्थर बन रहे हैं

मेरे आंसुओं पर तुम्हारा अब तक कॉपीराइट है
इसलिए वो अब तक बह नहीं रहे हैं

बहुत कुछ हो चुका है
बहुत कुछ बिगड़ चुका है
सबकुछ रीअरेंज हो गया है कहते हैं उस पर
मेरी किताब में स्वहस्ताक्षर में तुम्हारे जान-बूझकर छोड़े हुए सांप
झट से उठकर माथे पर डंसते हैं
और कपालमोक्ष अंकित करते हैं

हमारे एक्सचेंज किए हुए धागे घिसाए नहीं घिसते
और इस शिशिर में स्वेटर भी नहीं बनते

मैं प्यार में आत्मा भी नहीं बेचूंगा इसलिए
क्या क्या तुमने अपनी शरीरनिष्ठा का दिवालिया निकाल लिया?

तुम अपने तरीक़े से अमेरिका में डॉलरजड़ित
मैं अपने तरीक़े से भारत में निर्वाणजड़ित

फिर भी यह पतझर-पीड़ित काई
इस कमरे में बढ़ती ही जा रही है

रोज़ नए ब्रैंड का सूरज उगता है
पुराना ब्रैंड चांद बनकर ढल रहा है

इस पतझर में मैं तुम्हारा कौन-सा हरा खोज रहा हूं?

तुम्हें मैसेज मिला कि मैं ओके हुआ करता था
अब वो सारे मैसेजेस ओके साबुन की तरह आउटडेटेड हो रहे हैं

तुम्हारी त्वचा की बयार अब तक मुझे किस कर रही है
और उसे मिस करना मेरी जान पर बन आता है

तुम्हारे सांवले सौंदर्य का नखशिख ख़ज़ाना
अब भी अनेक रत्न चमकाता मेरी देह में घूमा करता है

तुम्हारे नितंब यानी राजस्थानी ढोल
आज भी मेरी कोशिकाओं में बजते हैं

मेरे कितने औज़ार खर्च हो गए
प्रेम की एक गुडी खड़ी करने के लिए

त्वचा के नीचे सांस लेता प्रेम
त्वचा का रंग पलटने वाली वासना
हम दोनों में डूब गए
और कलेजे के तीव्र काले-काले क्लॉक
स्तन-स्तन से क्षण-क्षण पिए

पत्ते झर रहे हैं या तुम्हारे स्तनों के डोंड़े?

मेरा स्ट्रगल ट्रबल बन गया
और उसमें पहला विकेट हमारे कम्यूनिकेशन का गिरा

मैंने कहा कि बादल तोड़कर लाऊंगा
और घर के नल में पानी आया ही नहीं

मैंने जिस जेब में पेजर रखा था
उसमें छेद पड़ गए और तुम्हारे मैसेज बह गए

फटे प्रेम के फीके आकांत थपेड़े मारने वाले
पैबंद लगाकर क्या कभी प्रेम को सिला जा सकता है?

तुम्हारे ह्रदय के स्वर्ण मंदिर पर
आतंकवाद ने कब्ज़ा कर लिया
और मेरे पीतल को उघाड़कर तुमने कहा
“सरेंडर”
मैंने कहा, “यह जेंडर फ़र्क़ क्यों?
तुमने किया तो प्रेम मैंने किया तो व्यभिचार?”

बोरीवली की आय सी यू कॉलोनी में
आइसक्रीम खाते हुए मैंने हाथ पकड़ा
तो मेरे हाथ तुम्हारे कलेजे की बर्फ़ लगी
तभी मैंने जान लिया था कि
तुम हिमालय चढ़ोगी
और ऐल्प्स के ऊपर से अमेरिका में ढहोगी

काउंटडाउन होने की टाइमिंग मैंने साधी
या तुमने साधी?

हम शरीर बनकर सोया करते थे
और प्रतिमा बनकर उठा करते थे

प्रार्थना भेजते समय भगवान को गर्भगृह में नहीं रखा करते थे
और विशेस और ब्लेसिंग्स
स्ट्रेसिंग और ट्रेसिंग में ट्रांसफॉर्म करते रहते थे

यह पतझर यानी उनके बन चुके ट्रेसिंग पेपर्स हैं क्या?

एक-दूसरे को समझने के लिए
हमने एक-दूसरे पर कविताएं लिखीं
और दोनों गद्य बन गए

आख़िर तुमने राज किया
फिर साम्राज्य बनाया
और अंतत: खालसा बनाया

मैं नानक वाणी का पालक पनीर बन गया

जोक शेयर करते हुए
मुस्कुराहटें उड़ाईं एक-दूसरे के होठों पर हमने
और किस बनकर लोटे एक-दूसरे के होठों में

चद्दरें कौन धोएगा इस पर लड़े एकांत में
और संभोग किसने औंटाया इस पर पब्लिक में चर्चा की

तुम्हारी एक सॉफ़्ट किस सॉफ़्टवेयर से ज़्यादा महंगी क्यों हो गई?

तुम एग्ज़ॉस्ट होकर आया करती थीं
और मैं संभोग का पानी भरकर तैयार हुआ करता था

शरीर के पार विक्टिम?

यह पतझर किसने ऐक्टिवेट की हमारे रिश्ते में?
इन बत्तियों को कौन भार विनियमन के तले ले आया?

बिजली तो आते-जाते खेल रही थी हमारे आंगन में
रीढ़ की हड्डी हमेशा ओवरपॉप्युलेटेड होती थी उत्साह में

तुम्हारे सादे फ़्लैश से
कैमेरे चमक उठते थे फ़ोटो खिंच जाते थे

इस खून के स्टूडियो को किसने ख़ाली कर दिया?
एवरग्रीन सौंदर्यस्थलों के दांत चेक करने की नौबत कब आन पड़ी?

जिप्सी क्वीन ग्वार तोड़ते-तोड़ते मर गई
या भिंडी न तलने की वजह से उसके गीत बुझ गए?

वटवृक्षों की बेलें बनकर
भावनाओं के ये जंगल गार्डन में कब सेटल हो गए?

बहुत पुरानी बहुत नई
कभी लगा करता कि तुम्हारी पी एक डी हो गई
कभी लगा करता सिर्फ बारहवीं

हमेशा टीनएज में रहने वाली स्त्री को कैसे बरता जाए?

टीनएज का ग्रेस और अंग भर कौंग्रेस
घास का चार्म खोया नहीं
पर तुम्हारे शरीर का पसीना अलार्म बन गया झगडे का

थकान के नसीब में डान्स नहीं हुआ करता
और बेकार के भाग्य में रोमान्स नहीं हुआ करता

मैंने कहा
“आकाश रो रहा है”
तुमने कहा
“नीली मारुति ले लो”

क्या सचमुच मारुति आकाश को तौल लेती?

मैंने तब प्यार किया था
मैं अब भी प्यार कर रहा हूं
लेकिन उत्खनन से
वर्तमान के सवाल नहीं सुलझते

बीमार शरीर में प्यार के शिगाफ़ पड़ रहे हैं
और वैसलीन देने वाली तुम वहां उस पार
अमेरिका में तुम्हारी झोंपड़ी

तुम्हें छोड़ने के बाद भी तुम्हारे बारे में ही सोचता रहा
विरह जैसे प्लैन किया था वैसे हुआ
फिर भी ढहने वाला ढह गया

प्यार का मुक्का मोहम्मद अली से ज़ोरदार
कलेजा नहीं फाड़ता — कूट देता है

हमारे प्रेम की शुरुआत किस से नहीं हुई
डेरिडा से हुई
ग्रामटॉलजी के शुद्ध जंगल में
हमने एक-दूसरे पर सेब फेंकें

वो फ़ेक निकलेंगे ऐसा कब लगा था?

मैं दारू पीता पतझर पी रहा हूं
कभी खंबा कभी सिप

यह सब पूरा फ़्रेम बनाकर मेरी वॉल पर कब लगाया जा सकेगा?

सुसंगत का स्ट्रोक मुझे नहीं आया है
यह प्रेम का असंगत आचरण मैंने भी कहां सीखा था?

तुम्हारे गले की सिसकी टैम्पो जैसी आवाज़ किया करती
तुम्हारी उसांसे सिरहाने ओढ़-ओढ़कर सोने चले जाते

व्यक्त होना यानी हिंस्र होना
क्या यही समझ थी तुम्हारी?

तेरे-मेरे प्यार में पैशन के न जाने कितने गिलास फूटे
मेरे दिमाग़ अनब्रेकेबल है मेरी यह धारणा फूटी

शांति कल्पना बन गई
और शब्द कूबड़ लेने वाले महायोद्धा बनकर
काट दिए गए

सच की राह चलते
झूठे-सच्चे रीमिक्स होने लग गए
और समझ में आया कि
तुम मेरे निर्वाण का महाअवरोध हो

तंत्र मार्ग से मोक्ष साधने की इच्छा रखने वाला मेरा काम योग
एकदम से रुक गया
और कामवासना को गालियां देकर
मैंने आगे का स्टेशन पकड़ा

संभोग से समाधि?
घंटा
संभोग से सिर्फ़ मादाएं

यह भी तुम्हारा ही उपकार है कि
मैं तंत्र से हमेशा के लिए मुक्त हो गया

क्या उसी तंत्र का है यह पतझर?

नाड़ियां हलवा बन जाती हैं
धमनियां खट्टा-मीठा दलिया
और मैं रोज़ तुम्हारी याद में ब्रेकफ़ास्ट शुरू करता हूं

इन मुरझाई आंखों को तुम्हारा चेहरा नहीं दिखता
मुखौटों की ही भीड़ में गर्दन मरोड़ दी हमने
एक-दूसरे के चेहरों की

प्रेम इतना ख़तरनाक हो जाता है कि
न दिखाई देने वाली ग़लतियां
कलेजे पर हिमालय रखकर जाने लगती हैं
और सह्याद्रि तो होता ही है
जन्म से ही दिमाग़ में
पुराना और प्राचीन

मैंने तुम्हें जाने दिया
या तुम प्लैन बनाकर चली गईं?

सोने के सिक्के फेंका करती थीं तुम
अच्छा मूड होने पर
फिर सोलकढ़ी क्या और दालचावल क्या

तुम्हारे जैसा बढ़िया पकवान बनाने वाला हाथ मैंने नहीं देखा
जब परोसता तो सुग्रास सुगंध उगाया करता
जब सिकुड़ा तो घर में सादी घास तक नहीं उगती थी

फैंसी शूज़ और रिऐलिटी वाले पैर

अब तक तुम्हारे पैर और शूज़
के बीच का फ़र्क़
मुझे नहीं मिल रहा है

यह पतझर इतना सिर-खपाऊ कब से बन गया?



“अरेस्ट वॉरंट निकला इसलिए”

अरेस्ट वॉरंट निकला इसलिए मैंने कोई भी जोखिम न उठाते हुए चुना भाग जाने का कामचलाऊ तरीका!

रास्ते में दाढ़ी बढ़ा ली.

सेफ़्टी पिनें बेचीं. नक़ली नाम धारण करके लोगों को असली घर बनाकर दिए और प्लास्टिक सर्जरी करके खोल दिया सस्ती दरों पर इलाज करने वाला अस्पताल.

आख़िर एक दिन बहुत दर्द हो रहा था इसलिए ख़ुद के टेस्ट्स करवाए डीन की कुर्सी में बैठकर तो रिज़ल्ट आया सर्वसम्मति से ‘कैंसर’.

ताकि मैं बीवी-बच्चों के बीच मरूं मैं हिंदुस्तान लौट आया और पाया कि बीवी ने दूसरी शादी कर ली थी और बच्चे ऑस्ट्रेलिया में जाकर सेटल हो गए थे.

आख़िर यह सब मेरे ही पापों का फल है सोचकर खड़ा हो गया पुलिस के सामने और कहा, “गिरफ़्तार करो.” पुलिस ने कहा, “हम तुम्हें नहीं पहचानते. जिसके नाम पर अरेस्ट वॉरंट था उसे हमने सात साल पहले ही मार दिया.”



मेकअप लगाकर जीने वालों का काफ़िला

हम फ़ेमस नहीं होंगे
इस बात का डर लेकर
मेकअप लगाकर जीने वालों का काफ़िला
कहां जा रहा है?

डिस्मेम्बरिंग करने वाला यह स्ट्रगल
क्या उन्हें हमेशा डरावना लगता है?

ख़ुद की विरासत इरेज़ करते हुए
प्रस्थापितों की विरासत सहते हुए
सही वार की राह देखते हुए
वे अभिनय की तलवार को धार लगा रहे हैं
शरीर हवा पर घिसते हुए

एक अनसेटल्ड कल्पना विलास
अनसिग्निफिकंट/magnificent के दरमियान
दोलायमान होते रहने का पर्मनेंट प्रपोज़ल

ख़ुद के करिअर का landscape दिखाई नहीं देता
पर हर किसी की जेब में
ख़ुद की प्रतिभा की फ़ोटो है

आंखों को identity नहीं दिखती
पर फ़ेम दिखता है

मोर और डायनासौर
को एक साथ नचाने वाला यह शहर
मांसाहारी है
यह उनके लिए केवल सुनी-सुनाई बात है
और जानकारी को कन्फ़र्म करने में लगने वाली फ़ुरसत
यह शहर उन्हें नहीं दे रहा है

ग्लोबल हो चुका कोकाकोला पीते हुए
वे struggle कर रहे हैं
दिन-रात
रात-दिन

काल उन्हें struggle में झेल रहा है
पर उसे भी पता नहीं है
वो क्या बनने वाले हैं
अचार या मुरब्बा?
 है

***
 


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