सचिन केतकर
 

ख़राब हो चुके सूरज की मरम्मत करते समय बोले जाने वाला स्तोत्र

ज़ंग लगा मांसल स्पेअर पार्ट
काल के कबाड़ख़ाने से
मैं उठा लाता हूं
एक ख़राब हो चुके सूरज के लिए
उसमें डालता हूं
कालबाह्य ग्रीस

उसके नरकस्थ स्प्रिंग
कैलाशवासी समकोण
और मरी हुई वारकरी घड़ियां
फिर से चलाने की कोशिश में जुट जाता हूं
उसकी ख़राब सुइयां
सड़ चुके सॉकेट में डालकर
उसे रीचार्ज करने के बखेड़े में पड़ जाता हूं

पर उसकी अल्ट्रावायलेट बैंगनी आंखें
आकाश की ओर टिकी होती हैं
बाघिन के दूध के पाउडर से बना दूध पीकर बड़े हुए
स्क्रूड्राइवर की मैं आराधना करता हूं
पर उसकी डिस्इंटिग्रेटेड चिप में
किसी भी तरह का कोई संचार नहीं होता

अब उसके दिन लद गए हैं
धीमे पड़ चुके हैं उसके आभास में ठनकते
दिल के यांत्रिक स्पंदन

जब उसका ठंडा दस मन का कांच का शरीर
शांत होगा तब
कुछ भी नहीं हुआ यह समझकर
मूंद दो उसकी
कार्बन आंखों को.  
बाज़ार में मिले हाथी के लिए दो शब्द


तुम पर दया आती है
जब तुम्हारी स्थूल झुर्रियों से भरी काली देह की तुलना
तुम्हारी गोल पनियाई करुणामय आंखों से करता हूं.

तुम शूर हो सकते हो, क़िलों के दरवाज़ों पर
लगी कीलों को सर से धक्का मार सकते हो
पर तुम क्रूर नहीं धूर्त नहीं.
वरना महावत को बैठने ही क्यों दिया होता
अपनी राजसी पीठ पर?

तुम बुद्धिमान हो सकते हो, बुद्धि के देवता सकते हो
पर चालाक बिलकुल नहीं हो
वरना क्यों उठाई होती शर्मिंदगी
इस भगवे पाखंड की बलि चढ़कर?

तुम हमारे भीड़-भड़क्के वाले बाज़ार से
गंध लगाए संधि-साधुओं के पीछे
डोलते झूलते
छाज जैसे कानों से मक्खियां उड़ाते हुए
जा रहे होते हो तो लगता है
कि हमने सिर्फ़ भीख मंगवाने का साधन बना दिया है
तुम्हारी मीठी जंगली काली आत्मा को.

तुम्हारे पीछे बच्चों, कुत्तों और बघ्घियों का जमघट होता है.
मैं तो बस तुम्हारी खंभों जैसी टांगों को
रस्सी जैसी पूंछ को, दीवार जैसी पीठ को और
पेड़ के तने जैसी सूंड को छूकर
तुम्हारे सच्चे आकार का
अनुमान लगाने में खो जाता हूं.



एक कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए चिट्ठी

गंदे चित्रों से भरी करप्ट फ्लॉपी की तरह
मेरी आत्मा करप्ट होती जा रही है

उसमें अब और कुछ भी स्टोर नहीं किया जा सकता

इसलिए तुम्हारी आंखों के सुनसान मॉनिटर में

UNABLE TO READ FROM THE SPECIFIED DEVICE
RETRY/CANCEL का मैसेज बॉक्स

अब मरम्मत के पार हो चुका है

मुमकिन हो तो फॉरमैट कर दो
क्विक इरेज़ कर दो
वरना सीधे डाल दो उसे

कूड़ेदान में



औरंगा

टहलने के लिए निकली
किसी लड़की की तरह
घूमते-घूमते
हमारे गांव के सिवान के बाहर से
तुम चली जाती हो
अपनी नीरव मीठी आंखों से
कहीं भी न देखते हुए

मेरे सपने में आते हैं
तुम्हारे शांत मंदिर के
मीठे पानी की मछलियों के झुंड
तुम्हारे तल के बेल-बूटों में
भटकते

और मैं डालता हूं किनारे से
अपने ग़रीब हाथों से
अपने जाल के चिथड़े
तुम्हारी शांत सतह पर
तुम्हें पकड़ने की आशा में



मेरी आंखों में बिल बनाकर रहता है


मेरी आंखों में बिल बनाकर रहता है
यह हरा पीला मोटा मेंढक

तीन-चार ब्रह्मकल्पों की नींद निपटाकर
बरसात शुरू होते ही
वह मेरे माथे पर आ धमकता है

और गले के गुब्बारे फुलाकर गाता है
मादाओं के लिए अपने
कर्कश वीभत्स गीत

सुनो
गदले तालाब के उस पार से
आ रहा है उसके गीत का
प्रत्युत्तर



नीले फूलदान में


नीले फूलदान में
एक दिन मैंने बोया

एक गोरा-गोरा हाथ

हाथ में थे
उंगलियों के पत्ते सात

लगा
कैक्टस में भी फूल आते हैं

तो इसमें भी उगेगा
कोई छोटा-सा पीला फूल

पर उसमें उग आया है
छद्मी चालाक

सूरजमुखी



भूगोल की कक्षा में खिड़की से बाहर झांकते हुए

मेरी बाईं पुतली में
महाराष्ट्र का भौगोलिक नक़्शा
जड़ा हुआ है

यह है दक्खन का पीला पठार
यह पथरीली सह्याद्रि
यह ताप्ती की घाटी
यह कोंकण यह विदर्भ-मराठवाड़ा

मेरी दाईं पुतली में छिपा है
गुजरात का नक़्शा

यह है सौराष्ट्र यह कच्छ का रण
यह नर्मदा यह डांग का जंगल

और यह देखो
यहां
मैं



पुरानी कविताओं को थर्ड डिग्री देते हुए

एक बार मैंने अपनी पुरानी कविताओं को
थर्ड डिग्री देने का निर्णय लिया

मैले-कुचैले कपड़े पहने हुए
बढ़ी हुई दाढ़ी वाले शब्दों को
रिमांड पर लेने के बाद
बेरहमी से पीटा

बर्फ़ की सिल्ली पर उल्टा लिटाकर
उनके गंदे चूतड़ों पर
खरोंचीं
काली-नीली
निष्ठुर पंक्तियां
नई कविताओं की

उधेड़ डाली
उनकी फफूंद लगी चमड़ी
उनकी लहूलुहान
काली आत्मा देखने के लिए
नमक के पानी में
डुबोने के लिए

उनके पिछवाड़े में
तीखा-चरपरा टाइगर बाम ठूंसकर
अपने अचूक पिंजरे में
पकड़कर रखीं
उनकी यहां-वहां उड़ती चीख़ें

एकाध बार
छोड़ भी दूंगा उन्हें
पैरोल पर
एनकाउंटर करने के लिए

 

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