Charl Pierre Naude

विज्ञान की खूबसूरती


एक शाम
मैं नीचे गया था
शोरगुल से भरे मुख्य मार्ग पर
लैम्प चमक रहे थें
जैसे
तारों के जाल में फंसे सितारे

रेस्तरां की वो मद्धिम रोशन खिड़कियां
अतीत की परिक्रमा
जैसे तारागृह में
झिलमिलाते वृत्ताकार चक्र

हम एक चीनी रेस्तरां में घुसे
वह जगह जहां हमने सृजन को समझना शुरू किया
हममें से प्रत्येक
एक अपरिपक्व खगोलज्ञ

बहुत सतर्कता से
परिरक्षित किया है
इस बहृमांड को
जूते के डिब्बे में
और एक दिन अप्रत्यासित
धुंधली आशुचित्रों से
लबालब
वह भानुमती का पिटारा
ताखों पर से नीचे गिरता
और विज्ञान जीवित हो उठा
जैसे हवा में सीधी लकीर खींच गयी हो
कैसे ये सूक्ष्म चौकोर कालीन पर चारों तरफ घूम रहे है
ये बताते हैं
जीवन का अंत:प्रवाह
पूर्णतः आकस्मिक है।
लेकिन दूसरों को विश्वास है
कि
सृजन सूक्ष्मतम नियोजन को परिलक्षित करता है।

देखो राख की बारिश
या बर्फ की
प्रत्येक येशु कण
षड्कोणीय
गुलामों के द्वारा निर्मित
गिरिजाघर
जिनमें महान आत्मा
धीरे धीरे उतरती है
यह मान लिया गया है कि
व्योम और उसमें उपस्थित हर चीज घुमावदार है
(तो मनुष्य के परिपेक्ष्य में,क्या यह जोखिम है)
हम एक जोड़े के सामने बैठे हैं
जिसने अभी अभी खाना ख़त्म किया है
लड़की कानों की लबों को चटका रही है
दोनों तरफ बारी बारी से
उसने अपने छरहरे हाथों से अपने कान के लब को छुआ
हथेली ऊपर की ओर मुड़े
जैसे टहनी पर पुष्प पंखुड़ियां
और उसके एक हाथ में
मूंगा पत्थर सौम्यता से स्थापित
जैसे कोई दिव्य टुकड़ा
ईश्वर, विज्ञान,प्रेम
इन्हें एक दूसरे से बार बार मिलना चाहिए
मेरे मन की आंखें उसके गर्दन के घुमाव को देखती रहती है
आगे झुकती है जरा सा
ताकि चुम सके प्रिया को
उस क्षण की गंभीरता
क्या तरकश का इशारा
और सौम्य सहजता
जिससे उसने ग्रहों
को अंजलि में भर रखा है।


अनुवाद - अनामिका अनु



कल और आज
yesterday and tomorrow with catch


वक्त
जिसे हम एक नाम देते हैं
जो अतीत में गीले सिमेंट पर चले थे
और इसलिए
वे हमें कभी नहीं छोड़ते वर्तमान में
इसे समझना कठिन है
वरण करना और भी कठिन
हवा बीज की फलियों में सीटी बजा रही है
जैसे
तस्वीरों में यादों का आलोड़न हो
यह पुनरूत्थान का आह्वाहन
जैसे कोई अपने नाम का पूतला हो
एक जल रंग
पूरे शहर को पुनर्जीवित करता
महाजाल जो गहरे पानी से ऊपर उठता है
ज्वार भाटा
झील की सतह पर
सी टी सी नक्काशी करता
भंवर के समकेंद्रित वृत्तों की तरह
गाओ
मेरी उंगलियों के पौरों के निशान पर
अनुवाद - अनामिका अनु

.
बसन्त का कंकाल डिजाइनर टेबिल के साथ
Skeletal spring with designers Table


एक कंकाल जैसा फ्रेम
मेरे बैठक में जिसने
कांच के पट्टे को थामे रखा है
जिस पर कपें रखी हैं
चीनी मिट्टी की चांदी सी झिलमिलाहट
भूत जैसे अलग हो गयी है
उस लौह सांचे की हाथों से
पारभासी सतह के नीचे
गोधूलि का मद्धम प्रकाश
समय को दो लोकों में बांटता हुआ
जुलूस के ऊपर झलकते हरे छींटे
जैसे पीली घास के टीलों के पार बच्चों की सेना हो
जब हवा के झोंके
बालों की नई लटों को
आलोड़ित कर रहे हो
एक जेट विमान
सपनों के लोक को भरभराता है
लेकिन उड़ान जारी रखता
पंक्तिबद्ध पत्थर एक दूसरे पर रखे
अचानक उथले में गिरे
इसी तरह अस्तित्व के क्रम
एक दूसरे पर लदे चढ़े
पहले जीवाणु
फिर चिड़िया के उड़ान के नमूने
और फिर बाद में
अनदेखे रन वे
अतिसूक्ष्म प्रकाश ऊर्जा कणों के द्वारा गाये जाते हैं*
टिमटिमा रही हैं छोटे से बंदरगाह की टोकरी में
मुट्ठी भर सूईयां
और समतल समुद्र क्षितिज में इंचों ऊपर उठ गया
जैसे खमीर लगा लगा आटा बर्तन में
मौसमी बाढ़ में
बगल का द्वीप डूब जाता है
सिर्फ बच जाता है
केन्द्र में टीले पर बना वह घर
एक स्वर्ग की उंचाई
जहां से ज्वार वस्त्र सा उतरती
नीचे छोड़ती एक बर्बाद हुआ दिन
और ऊपर एक नई दुनिया
जैसे इनको बांटती सीमा रेखा
बनाई गयी हो
माइंस वान के द्वारा


अनुवाद - अनामिका अनु



.सुबह और शाम श्वेत कबूतरों के साथ


आकाश भरा पड़ा है इन प्रभाती श्वेत कबूतरों से
जहां भी वे जाते हैं
ये पहले से ही वहां होते हैं
दिन स्वप्न की तरह
हवा में कुलबुलाते
झरझराते झरने से एक हाथ से तोड़ें जाने पर
और फिर
इसकी चमक फीकी हो जाती है
मानो प्रातःकालीन आभा में मंद नक्कासी
वाले चित्र हो
और आकाश भरा पड़ा है
पहले से ही इन प्रभाती श्वेत कबूतरों से
आज या हो सकता है
यह कल भी था

इसके विपरित
इसके बाद
उल्लू रात में वास करते हैं
जब वे उड़ान लेते हैं
अपने लाल भूरे ब्रशों से
वर्तमान को भूरा रंग देते हैं
और पहले की कोशिशें तुरंत प्रभाव से
जंग के रंग सी हो जाती है
तुम्हें याद है

वो खाली घर में फुटबॉल खेलना
“पुराने जमाने के लोग”
“शायद अपने सगे”

रौशनी खपरैलों के बीच तुम्हारे देह पर उतरती
जैसे फंतिगे के पंख पर के आंख चिन्ह
संगीत के रागों में
गर्मी की फुहारें
पोल्काडाॅट आच्छादित बिकनी में

लबालब जैसे आयामों के
संरक्षित बर्नी जो पंक्ति में खड़े हो
आदिम यान ढलान पर के मधुमक्खी के
छत्ते के गायन को जगाता
और राख का संख्या में टकराना

आकाश प्रभाती श्वेत कबूतरों के साथ श्याम
और
सारा समय पारभासक
उस साइकिल की तरह
जो रोशनी के विपरित जा रही हो


अनुवाद -अनामिका अनु

Charl Pierre Naude साउथ अफ्रिकन कवि है, जो अपनी खास कविता शैली के कारण प्रसिद्ध हैं।
 


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