अशरफ अबोल याजिद (ASHRAF ABOUL-YAZID)



कुछ गीतो से सताये जाने पर मैने
सन्नाटे के शोर से परे, अपने कान लगाये

उन्हीं दुहराई गई खबरों को सुनने के लिए

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मैं शनानटे के पत्थर को सिर से बांध
गिरता हूँ
नीन्द के समन्दर में
जैसे कि कोई लंगर
समन्दर का सीना चीरता हो

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मेरे सिर के ऊपर से
मौत की यादें उगरही हैं
मेरी स्याही की दवात पर गिरने के लिए
इससे गुजरते हुए लोग उस तरह बिखर जाते हैं
जिस तरह हवा के हाथों तमाम खत

वे, जो मेरे दिल में
के पार निकलते हुए भ्रम हैं
मैं कभी भी शान्तता नहीं पाउंगा
जब तक मेरा दिल अंधेरे की शाल में
अंकुश ना डाले।

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मैं सोने से पहले अपनी बेटी को
एक कहानी सुनाता हूँ
लेकिन जब तक हमारी कहानी का राजकुमार
जवाहरात जड़ी जूतियों वाली राजकुमारी से मिल पाए
रात हम पर आक्रमण कर देती है

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Benha*

दिन की खिड़कियों को
पिछली रात के सपनों के मुंह पर बन्द कर दो

जिससे मुझे अपने बीते दिनों पर
पर्दों के पीछे से रोने की
मुहलत मिल जाए


नदी नाइल के स्तन के चुचुक पर
बेहना सोता है, इसके शहद को मेरे
सपनों पर उड़ेलता हुआ

मैं सोचता हूँ कि जब मैं घर लौटूंगा तो
क्या सारी गलियां मुझे याद रहेंगी?

या बहना को मेरा चेहरा भी याद होगा
जिस पर नई थकी  गलियां खुदी हुई हैं?


#कवि का शहर

प्रेम

जब मैं अपने पुराने स्कूल लौटा
अपनी पुरानी कक्षा में गया
वह बच्चा, जो मेरी पुरानी डेस्क पर बैठा था
मेरे बचपन जैसा नहीं लग रहा था
कदापि नहीं

लेकिन मुझे वह प्यारा लगा

…………………..


घोर बरसात में
कोई भी महसूस नहीं करता
एक अकेली बून्द को
…………………..
अनुवाद रति सक्सेना
Translated by Rati Saxena

 

अशरफ अबोल याजिद (ASHRAF ABOUL-YAZID)अरबी भाषा के महत्वपूर्ण कवि है, आप स्वतन्त्र पत्रकार और उपन्यासकार भी हैं।


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