ओनार सकरिया /Onur Sakarya तुर्क के युवा कवि
 


कुदरत

बस ड्राइवर, लगता है कि तम मुझे पहचाने नहीं
मैं कुदरत हूँ, जहां ठौर मिलेगी उतर जाउंगा
जहां मैं देखूंगा, कि जगह उपलब्ध है
मैं अचानक अलग हो जाउंगा
मेरे अब्बा ने मुझे तभी छोड़ दिया था, जब कि मैं छोटा था
वे पूरी तरह से गलत भी नहीं थे
मेरी देह थोड़ी बाई ओर जो झुकी है

बस ड्राइवर. इस गीत को और मत बजाओ
मैं टाई पहनता हूँ लेकिन ठोंकता जोर से हूँ
मैं एक अफसर हुआ करता था, लेकिन निकाल दिया गया
मेरी एक पत्नी, एक बच्चा, और एक मकान था
शारब मेरी बीबी को डकार गई,
वह मेरे बच्चे को डकार गई
उदासी घर को हजम कर गई

जैसे ही सात बजते हैं , मै ताड़ी घर को खोजने लगता हूँ
जैसे मै देखता हूँ कि कहीं मिल रही है
अचानक पहुँच जाता हूँ
जानते हो, एक माहिला थी, जिसका नाम नैमत था
वह हमेशा साड़े आठ बजे मिलती थी
वह भूरे बालों वाली है, जरा बहुत चकराने वाली भी
लेकिन थोड़ी बहुत ठीक ठाक भी
मैंने उसे कभी भी मिने वाले से जुदा होते नहीं देखा

बस ड्राइवर, जरा एयर कण्डीशन चला दो, हम लोग भुन रहे हैं
मेरा कोई दोस्त नहीं , बस यह शराब है
मैं आदमी हूँ, वक्त व्कत पर रोता हूँ
हड्डी, नसें, मांसपेशियाँ, और गोश्त
और गन्दगी

अहंकार हमारे जिस्म से चिपका हुआ है

बस ड्राइवर,

आदमजात सांस से बने है


अनुवाद रति सक्सेना
Translated by Rati Saxena


 


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