एक बेहतरीन राजकीय कविता

मूल अंग्रेजी कविता...जेम्स टेट
हिंदी अनुवाद...नेहा भंडारकर

*सरकारी झील*

खिलौनों की दुकान का रास्ता सड़क पर गिरे पेड़ से अवरुद्ध था।
एक पुलिसकर्मी उस सड़क का यातायात निर्देशन कर रहा था।

मैंने उससे पूछा, "क्या हुआ?"
उसने कहा, "रात में बिजली गिरी।"
मैं वापस मुडा और दुसरा रास्ता ढूंढते हुए दुसरी सड़क पकडी।
अन्य सड़कों को भी रास्ते पर गिरे हुए पेड़ों की वजहसे रोक दिया गया था,
और मैं खिलौनों की दुकान पर वापस जाने का रास्ता नहीं खोज सका।
मैं गाड़ी चलाता रहा और जल्द ही मैं शहर के बाहरी इलाके में था।
मैं एक राजमार्ग पर चला गया और जल्द ही खिलौने की दुकान को भूल गया जहां मुझे पहुंचना था।

मैंने ऐसा किया मानो मुझे सम्मोहित कर दिया गया हो।मोडपर दिये गये
पथ निर्देशन संकेत भी मैं नहीं देख पाया।
जागृतावस्था से पहले कुछ घंटों तक मैने परिचालन किया होगा,
फिर मैंने अगला निकास लिया अब मुझे पता नहीं था कि मैं कहाँ हूं।
एक ओर पंक्तिबद्ध पेडोंकी शृंखला
और दुसरी ओर फार्म हाऊसेस...
बीच की गल्ली से सिधा निकलतेही
रास्ते के अंत में एक झील दिखाई दी।
कार पार्क करके मैं
बाहर निकला और चलने लगा।
किनारे पर अनेक बंदरगाह थे।
मैं एक पर चलने लगा।
पानी में बतखोंकी तैराकी और गोताखोरी देखी।
झील के बीच में कुछ उछल रहा था।
मुझे यह महसूस करने से पहले कि वह एक व्यक्ति का सिर था,
मैंने इसे लंबे समय तक देखा।

फिर, एक पल बाद लगा वह एक नारियल था।
नहीं, नहीं ।
वह एक पुराना टायर था जो दाहिनी ओर तैर रहा था।
मैंने हार मान ली और पीछा करने लगा।
बतख जो अठखेलिया कर रहे थे,
अचानक उड़ जाते और झील में
अपनी जगह गोल चक्कर लगाते
और नीचे पानी से उपर आते
और फिर से छिप जाते।
यह काफी मनोरंजक था।

एक आदमी मेरे पीछे आया
और कहा, "यह सरकारी झील जनता के लिये वर्जित है।
आपको अभी यहां से जाना होगा।"
मैंने कहा, "मुझे नहीं पता कि यह एक सरकारी झील है।
इसे वर्जित क्यों होना चाहिए? "
उन्होंने कहा, "मुझे खेद है। मगर आपको यहां से जाना होगा। ”
"मैं यह भी नहीं जानता कि मैं कहाँ हूँ," मैंने कहा।
"बस, फिरभी आपको अभी के अभी जाना होगा,"
उसने कहा।

टायर की ओर इशारा करते हुए
मैने पुछा," उस आदमी के बारे मे वहा क्या चल रहा है?"
"वह मर चुका है," उसने कहा।
"नहीं, वह मरा नहीं है।
आखिरी बार उसे अपनी बांह हिलाते हुए मैने देखा था” मैंने कहा।

उसने अपने पिस्तौलदान से अपनी पिस्तौल निकाली और उसकी ओर एक गोली चलाई।
"अब वह मर चुका है," उसने कहा।

मूल कविता....जेम्स टेट
अनुवाद.. नेहा भांडारकर, नागपूर
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(जेम्स टेट {1943-2015} एक पुलित्जर पुरस्कार विजेता है, एकेडमी ऑफ अमेरिकन पोयट्स वालेस स्टीवंस अवार्ड, और नेशनल बुक अवार्ड सेभी सन्मानित है।)

 


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