गणेश कनाटे


गणेश कनाटे की कविताओं मे उन कोण को छुआ गया है, जिनके बारे में हम बात करने में कतराते हैं, दरअसल मौत को हमने इतना अछूत बना दिया है कि उसके बारे में बात करना भी अशुभ मान लिया जाता है, जबकि मौत सतत है, जो हमारे साथ हर पल चलती है, हम हर पल के जीवन के साथ पल भर मरते भी हैं,


१)
देह में अटकी एक कहानी


मैं तो बस चले जाना चाहता हूँ
इस देह में अटकी
इक कहानी लिखकर.

२)
के अब गुजर जाने का समय है!

ये कैसे गुजर गए हम चमन से
के दिल पे कोई नया रंग नहीं
के रूह में कोई खुशबू नहीं
वही स्याह दिल का आलम
वही बदबू से भरी छाती मेरी

कोई रंग लाओ
कोई इत्र लाओ
के अब गुजर जाने का समय है!

३)
तुम्हारी देह के अनुवाद की एक कोशिश

मेरी देह में सुरक्षित है
तुम्हारी देह के अनुवाद की एक कोशिश
अनुवादक की पहचान लेकिन खो गई है

कुछ शब्द गोलाकार
अनुदित नहीं हो पाएं
कुछ भाव गहरे
और गहरे उतर गए
मेरी देह तक नहीं पहुंची
कुछ की ध्वनि

पूर्णिमा के रात में
समंदर के साथ में
मैं फिर प्रयास करता हूँ
उस अनुवाद का

परंतु,
सच तो यही है
की खो गया है अनुवादक
और

४)
लाश, लाशें, घृणा और करुणा

हत्या, दंगा या युद्ध के परिणामस्वरूप
जीवंत देह से क्षतविक्षत मांस के लोथड़े में बदली हुई
लाश को देखा है कभी?

जिन्होंने उन लोथड़ों को कभी जन्म दिया था
या उनसे प्रेम किया था
वें भी नहीं देख पाते; आप क्या देखेंगे!

ऐसी किसी एक लाश को देखना मुश्किल होता है
आपको झट से उल्टी हो सकती है
आपके मन में ऐसी घिन जन्म ले सकती है -
जिससे आपको आजन्म घृणा हो
संभव है फिर ये लाशें आपको सोने ही न दें -
उम्रभर, आपके सपनों पर कब्जा करके

पर जब इन्हीं लाशों की संख्या सैकड़ों में बदल जाती है
और जब आप उन्हें देखते है किसी अखबार में छपे फोटो में
तो आप इन्हें देख पाते हैं
आप को उल्टी नहीं होती
आपको घिन नहीं आती
और सपना भी नहीं आता - लाशों का

अब आप हत्या के कारणों का विश्लेषण करते हैं
दंगों के कारणों का पता लगाने की कोशिश करते हैं
और आंतरराष्ट्रीय राजनीति में युद्ध का समर्थन ढूंढते हैं

आपको लौट आना चाहिए
इन सैकड़ों लाशों में से एक लाश के पास
बल्कि हर एक लाश के पास
उसे फिर करीब से देखना ही चाहिए
और आपको दिखाई देना ही चाहिए
उस लाश का हर जख्म और उसका लोथड़ा होना
आपको उल्टी हो ही जानी चाहिए
आपको घिन आ ही जानी चाहिए
और आपके सपनों पर हो ही जाना चाहिए कब्जा
इन क्षतविक्षत मांस के लोथड़ोंवाली लाशों का

तभी तो आप घृणा करेंगे
हत्या, दंगा और युद्ध से
और आपके मन में जन्म लेगी
अपार करुणा, मानव जीवन के प्रति

इसीलिए आपको
हत्या, दंगा या युद्ध के परिणामस्वरूप
जीवंत देह से क्षतविक्षत मांस के लोथड़े में बदली हुई
हर लाश को ध्यान से देखना चाहिए

५)
अधूरी मौत

मैं
मेरा घर
मेरे घर की दीवार
घर की दीवार में खिड़की
उस खिड़की से दिखता एक टुकड़ा आकाश...
- ये आकाश मेरा है

उस आकाश में उड़ती हुई एक चिड़िया
चिड़िया के दो छोटे पंख
पंखों की एक उड़ान
उड़ान की हद
फिर लौटना
घोंसले में...
- ये उड़ान उसकी है

चिड़िया मेरे कंधो पर कभी नहीं बैठेगी
न मैं बैठूंगा कभी उसके पंखों पर
वो न समझेंगी मेरा आकाश
और मैं उसकी उड़ान

बिन चिड़िया को जाने मैं मर जाऊंगा
और बिन समझे मुझे चिड़िया

ये तो बस चिड़िया की बात है
अभी मैंने कौओ-कबूतरों की बात की ही नहीं

कितनी अधूरी मौत मरूँगा मैं!

मैं अधूरी मौत नहीं मरना चाहता...


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