सुनीता कटोच  की कविता

 

 

कवि के जेब मे विचार होते हैं

हथियार नहीं

तुम्हारे पास हथियार है

विचार नही

फिर भी कवि मारा जाता है

और तुम कुर्सी पर बिठाए जाते हो

कुछ तो घुल गया है

हमारे देश की आवो हवा में

कि हम विचार शून्य हुए जा रहें है

क्या घुल गया है?

अफीम,चरस,गांजा,सिंथेटिक ड्रग,

या फिर बारूद ?

                                ( फरवरी 2019)

 सेल्फी -1

 सेल्फी
नितांत अकेलेपन
का गान है

सेल्फी -2

सेल्फी
आत्ममुग्धता की
पराकाष्ठा है

सेल्फी -3


सेल्फी गवाह है
हमें दूसरों की नज़र
में विशवास नहीं रहा

सेल्फी -4


सेल्फी भेड़ –चाल है
जिसका लीडर
सेल्फी और सेल्फी स्टिक को
पाताल में फैंक कर
खुद् जन्नत से
दूसरे भेड़ों को देख कर
अपना मनोरंजन कर बचा रहा है

 सेल्फी -5
सेल्फी इस बात का गवाह है
सबके भीतर उतना ही अकेलापन है
जितनी बाहर भीड़

                                (जनवरी 2019)


बेहद कठिन क्षणों में

दुःख और अवसाद के दिनों

मेरा ईश्वर मेरे भीतर

कुछ विचारों के बीज छोड़ गया
यह वही पल थे

जब मेरे भीतर की स्त्री
एक नए जन्म के लिए

बिलकुल तैयार नहीं थी

मेरी चाहतों का
ईश्वर की चाहतों से कोई मेल न था
हलांकि मैंने पूरी ईमानदारी से

उन विचारों को अपने भीतर की आग से तपाए रखा

यह विचार मेरे भीतर

विद्रोह का रूप ले रही थी

बीज का फल बन कर खिलना भी तो
इस सख्त धरती के खिलाफ एक विद्रोह ही है
मेरे भीतर रोप गए सब विचार
जब पवित्र हो कर 
मेरे शरीर की तमाम शिराओं से विद्रोह करते हुए
एक देह रूप में आया 

अलंकारों से युक्त
और प्रेम में डूबी इस देह को
मैंने नाम दिया  –कविता

इस सृष्टि में फैले तमाम विचार
उस  देह के हर अंग को निहारना चाहते थे
जैसे वो समुद्र मंथन से निकली सुन्दरी हो
जबकि मैं उसे इस  सृष्टि से बचाए रखना चाहती थी 
सिर्फ इसलिए कि  वो असहज न  हो जाए
पर बीज का फूल बनकर फिर बीज बन जाना
और पानी का बर्फ बनकर फिर पानी बन जाना
सृष्टि की सबसे सुंदर घटनाएँ है
विचार का देह बनना
और देह से फिर विचार बनना भी तभी सम्भव है
जब हम अपने विचारों के देह को सृष्टि से रूबरू कराएं
अब यह देह आप सब के सामने है
आप इसे निहारों
विचार के रूप में अपने घर ले जाओ
या इसे जला डालो
बस अपने वल्गर  एटिच्युड से इसका रेप नहीं करना

                                                (जनवरी 2019)


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