शुभम  की कविता

 
1

उदास बैठ
जब इतिहास कुरेदता हूं
ज़ख्म हरे होते है
ना मुस्लिम , ना हिन्दू
बस इंसा मरा होेता है
लाल, नीला, भगवा
हर रोज, एक नया
ना ..होता है बस

अंदर बेसकीमती है तू
बाहर तो देख एक बार ख़ुदा
मिट्टी का बना तू ,जमीं पे पड़ा होता है
किनारे बैठा उदास देखता
तुझे सिर पर लिए बाज़ार में
मेरा भूखा बेटा खड़ा होता है।

तू और तेरे लोग होंगे करिश्माई
पर तू भी एक बार देख ना
तेरे दर के बाहर
इंसा मरा होता है, इंसा मरा होता है।


2
आप न हिटलर न हम जर्मनवासी
सुरक्षा खातिर खाई लाठी
खैर कुछ कह न सका
क्योंकि
हमारा साधन तो गाँधी सा
पर आपकी खोपड़ी में कहाँ का नाज़ी था
ये मत कहना कि कोई गाज़ी था

वो कैसी मज़बूरी थी
या कि जीभ के नीचे चोरी थी
दोषी नहीं आप भी तो
नियुक्ति का आधार ही चापलूसों की चापलूसी थी
आप ही यहाँ के कुम्हार थे
फिर नाकाबिलों की नियुक्ति
सोच-समझकर या के मज़बूरी में
ये विचार की मज़बूरी थी कि धारा की कमजोरी
या के अर्थभोग की मुहजोरी

प्रवचन में तो राष्ट्रनिर्माण था
और आखिर में जगत कल्याण
अर्थ सत्यं जगत मिथ्या
यह अर्थशास्त्र की माया थी
शक्ति मूल है भ्रष्टाचरण का
दंद-फंद है कर्ता धर्ता ...

चरण चाटन हो पहचान जहाँ की
व्यक्ति, व्यक्तित्व, विचार और धारा
पैमाना केवल चरण बंदना
गाँधी या के नेहरू हों
व्यवहार में होगी हिटलरशाही
हमारा साधन तो गाँधी सा
पर आप कहाँ के नाज़ी हैं?


3

कर्ज ना सही दूध का
तेरा फ़र्ज तुझे ललकारता
क्यों कोसता वर्तमान को
अतीत के सीख़ को भुला कर
ख़ुद की सृजनात्मकता को सुला कर।

चल उठ संघर्ष कर इस ग़ुलामी सोच से
वर्तमान के चीत्कार को
बदल दे तू शोषितों के दहाड़ में
हिल उठेगा वर्ण सिंहासन
तब उगेगा सूरज उद्धार का।

भूला उस कल को
‎आज को क्यो कोसता
‎कर्ज़ ना सही दूध का पर
‎तेरा फ़र्ज अब ललकारता
‎अतीत से वो आवाज़
‎हर पहर तूझको पुकारती
‎माँ तुझे पुकारती ,माँ तुझे पुकारती।

4

नोचते रहना जब तक थक ना
फ़िर भी क्यो थकोगे
अभी मुझमे जान बाक़ी
आसानी से मार दोगे तो अफ़सोस होता
क्योकि तुम्हे तो हृदय सम्राट बनना है।

उनको तो अभी इसमे लड़ना बाकी
की मैं स्वर्ण थी या दलित
ख़ैर इंसान तो कहूँगी नही
इंसानियत तो नही दिखी मुझे
ख़ुद को जानवर भी कहते तो
थोड़ी तो करुणा होती।

अभी वो भी थके क्यों ..
गयी ही क्यों थी बाहर
कपड़े देखे थे उसके
ये तो कहना रह गया अभी
संस्कृति के ही ख़िलाफ़ थी मैं
इसी का गुनाह मिला
और वो न्याय के पुरोधा
क्यो न हो हृदय सम्राट है।

 

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