शूरौक हम्मूद (shurouk hammoud)

अनुवाद ‍ उमा

मैं यहाँ नहीं हूँ


मैं यहाँ नहीं हूँ
मैं नहीं सुन पा रही तुम्हें
कुछ शोर बिसराया जा चुका था अंतस की पुकार का
मुझे दिखाई दिए रात के स्याह पटल पर
खंजर, जो कि अब प्रेमियों के गर्दनों पर धंसे हुए थे
रात के ताबूत ने तैयार की इंतज़ार की धुन,
सैनिकों के जूते, जो कि खो चुके थे अपने मालिकों को,
खालीपन बोझ बन चुका है,
समंदर है कि उनकी प्रार्थनाओं को उगल रहे
जो कि अपनी जि़ंदगी की राह में मर चुके थे,
गीत जो कि चल दिए मृतकों के पीछे,
आसमान जो कि कसकर बंद कर रहे भोर के कान,
घर जिनके कि नाम बदले जा चुके हैं,
ध्वजा जिनके कि रंग खराब हो चुके हैं
और कच्ची दीवारें जिनकी रेत इन आवाज़ों के शोर से दूर भागती है...
जागृति का व्याख्यान है
पर कोई नहीं बचा उसे बांचने के लिए
इसलिए मेहरबानी होगी, मेरी चुप्पी को मत खरोंचो
मैं तुम्हारे साथ नहीं
कुछ कब्रें मेरे सिर के अंदर लटका हुआ फोन भूल चुकी थीं
फिर पर्दा गिरा दिया।
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एक सीरियाई आदमी के अवशेष से साक्षात्कार

युद्ध ने क्या किया हवाओं के साथ?
-इसने इसे टूटे हुए दिलों से सजाया,
डिब्बाबंद नमक और धुएँ के साथ।

मर जाने से पहले किसके इंतज़ार में थे तुम?
-मैं भोर की मुस्कुराहट के इंतज़ार में थी, जिसे मैंने अपनी कल्पना में
एक प्रेमी का रूप दिया था।

पेड़ों ने क्या सपना देखा, जब तुमने उन्हें उन हवाओं के बारे में बताया
जो कि तुम्हें ले जाना चाहती थीं?
- उन्होंने नृत्य का सपना देखा
उन्होंने और भी बहुत सारे सपने देखे, जिनके बारे में उन्होंने एक
ल$फ्ज़ भी न कहा।

क्या ऐसे स्थान थे, जो तुम्हारी कल्पनाओं में बारिश करते थे?
-हाँ, और मेरे रात के सपनों में ये मुझे मिले, इसलिए तो में एक और विराग के साथ दोजीवा हुई।

क्या तुम युद्ध से पहले और बाद में एक ही शख्स हो?
-कोई युद्ध से खाली हाथ नहीं लौटता।

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आततायी का एकालाप

आँसुओं की तरह निर्वसन
खंडित अंगों की चाह की तरह रुष्ट
एकतर$फा इश्$क की तरह नाकारा
एक सामूहिक कब्र की तरह अंधेपन से भरा हुआ
दर्पण से बनी खिड़की की तरह अकेला
छोड़े हुए घर की दहलीज़ की तरह ठंडा
सैनिक के जूतों पर लगे $खून की तरह काला
लार की जैसे बह निकले बंदूक के मुँह की तरह
मैं किसी आततायी की तरह अपनी कुर्सी पर आराम से बैठ गई
न्याय के बारे में आपसे बात करने के लिए
.....................

मैं

मैं महज़ एक टूटे दिल वाली औरत
कौन जानना चाहता है कि तुमने उसे क्यों छोड़ा
और अपनी छाया उसके हाथों पर भूल गए
उसका धुँधला रंग छप जाता है
उन तमाम हथेलियों पर जो उससे हाथ मिलाते हैं
मैं महज़ एक औरत हूँ
जो कविता के साथ कोशिश करती है
खारी रूह पर उभर आईं झुर्रियों को मिटाने की
इनके वापस जन्नत जाने से पहले

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मेरा पर्स

मेरे पर्स
में बड़े एहतियात के साथ रखे हैं
हर आकार के बटन
अचानक हुए सुराखों के लिए
सूई और काले धागे
जो सिल सकें दिल के जख़्मों और कपड़ों को भी

खाली सेनेटरी थैले वमन होने की स्थिति में
यहाँ रहने वालों को अकसर होती रहती है
नम कपड़े तकलीफें को मिटा देने के लिए
नमी लिए वाइप, मेकअप के धब्बों को पौंछने के लिए
मेरे पर्स (झोले) में बेकार की चीजों से भरा है
लम्बे सफर करने के कारण घिसे जूतों की पालिश
एक अदद मोबाइल, जिसमें भरे हैं बहुत से नाम, जो मुझे आज याद भी नहीं हैं
मेरा सस्ता चश्मा
आखों के डाक्टर की पर्ची
इस विवरण के साथ कि मैं अपनी नाक की हद से आगे देख नहीं सकती
सूखी सिगरेट और एक लाइटर जो काम नही करता
सूखे फूल और कविताएँ, जिनके पन्ने सिलसिलेवार नहीं
रूमाल जो कि अब अलविदा कहना चाहता है
और तुम पूछते हो कि मेरी पीठ क्यों दुखती है?

 


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