रोहित ठाकुर


पिता

पिता की मृत्यु किस साल हुई
वह मुझे याद नहीं है
अगर कोई पूछता है तो
मैं दुसरी तरफ मुंह करके ताकने लगता हूँ
मुझे हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिरने का
साल भी याद नहीं है
मेरे पास है पिता की पुरानी कमीज़
मैं उसे पहन कर
आईने के सामने आकर खड़ा हो जाता हूँ
पर मेरे कन्धे पिता की तरह नहीं हैं |


जंगल

जंगल से गुज़रते हुए
एक दिन मैं पेड़ बनूंगा
खेत से गुज़रते हुए अनाज का दाना
किसी चिड़िया के घोसले का तिनका बनूंगा
मैं बनूंगा तृण जिसे चरेंगे बकरियां
मैं नहीं बनूंगा दीवार
खिड़की बनूंगा किसी घर का
देवता पूछेंगे तो कहूँगा -
कि गिलहरी बनूंगा और
सरपट दौड़ लगाऊँगा पेड़ों पर
थकूंगा नहीं |


पानी

मैंने पानी को कई मौकों पर पानी ही कहा
जल नहीं कह सका
पैदल चलते हुए आदमी को पानी ही याद रहता है
पानी ही सूखता है शरीर का
पानी के लिए ही औरतें निकलती है घरों से
दरभंगा जंक्शन पर एक आदमी हड़बड़ी में पानी ही ढूंढ रहा था
पानी के लिए ही लड़ रहे हैं राष्ट्र
स्वप्न में किसी नदी के जल से आचमन करता हूँ
जल के बीज लाता हूँ
पानी के पेड़ उगेंगे घर के आंगन में |


निर्वाण के लिए बोध गया नहीं गया

घटनाएं क्रम से नहीं थी
घटनाएं चार से अधिक थी
सभी विचलित करने वाली थी
पर सांस लेने की फुर्सत नहीं थी
निर्वाण के लिए बोध गया नहीं गया
जन वितरण प्रणाली की दुकान पर गया
चावल के लिए
अस्पताल गया
दवा के लिए
दिल्ली , बम्बई और कलकत्ता गया
नौकरी के लिए
मेरे जेब में पैसे नहीं थे
कुछ हरे पत्ते थे
इस तरह धरती मेरी थी ।



नाम - रोहित ठाकुर
जन्म तिथि - 06/12/ 1978
शैक्षणिक योग्यता - परा-स्नातक राजनीति विज्ञान

हँस , वागर्थ , समकालीन भारतीय साहित्य , आजकल , बया , दोआब , परिकथा , मधुमती , सृजन सरोकार आदि विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित । सदानीरा , पूर्वी , आदि 50 से अधिक ब्लॉगों पर कविताएँ प्रकाशित ।
मराठी और पंजाबी भाषा में कविताओं का अनुवाद प्रकाशित ।
विभिन्न कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ
वृत्ति - शिक्षण



रोहित ठाकुर
C / O - श्री अरुण कुमार
सौदागर पथ
काली मंदिर रोड के उत्तर
संजय गांधी नगर
ककंड़बाग
पटना , बिहार
पिन : 800026
मोबाइल - 916200439764

 


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