Hans D. Amadé Esperer


मुझे अचानक वहां मेरा ठिकाना मिला

एक बार मैं गर्मियों के दिनों में खिड़की पर
कुछ ज्यादा ही टिका रहा, असंजस में
गोधूली में डूबते हुए
मैंने अपनी निगाह उदास बादलों की तरफ घुमाई
वहां वे उदास बादलों को प्रज्वलित कर रहे थे

एक बार मैं खिड़की पर अधिक देर तक लेटा रहा
गर्मियों के बाहर अनिर्णित
गोधूलि में तैरते हुए ...
मैंने पहाड़ी के ऊपर से आँखें उठाईं
वहाँ उन्होंने उदास बादलों को प्रज्वलित किया था
एक चमकदार रोशनी बुझने लगी
रोजाना का सलेटी रंग
आकाश में चढ़ती हुई तुम्हारी तस्वीर
मैंने जितनी गहराई से देखी, उतनी बेहतर दिखी

(
Hans D. Amadé की अन्य कविताएं))


Eldar Akhadov
 
मैंने तुम्हारी सारी तस्वीरें फाड़ डालीं
लेकिन फिर भी तुम याद आती रहीं

मैं बहुत बहुत दूर चला गया,
कि वापिस ही नहीं लौटूं

लेकिन फिर भी तुम याद आती रहीं

मैं किसी और से प्यार करने लगा
लेकिन , तुम फिर भी याद आती रहीं

मैनें शराब पी, धुत्त हो गया, बेवड़ा हो गया,अन्तिम जानवर की तरह
लेकिन तुम फिर भी याद आती रहीं

मैंने शादी की, बच्चे हुए, घरेलू बनता गया
लेकिन तुम्हारी यादों ने पीछा नहीं छोड़ा

अब मैं बूढ़ा हो रहा हूं, सब कुछ यादों से पुंछता जा रहा है

सिर्फ तुम्हारी यादों के
 


एलिसिया पार्टनोई Alicia Partnoy (अर्जेन्टीना)


आत्मवक्तव्य

उन्होने मेरे पाँवों के नीचे से
मेरे देश को खींच लिया
निष्कासन‍- नाम देते हुए


अचानक इस तरह
मेरे नीचे कोई जमीन नहीं
बस अब चारो तरफ दूरियां

लेकिन इस घटना से पहले
उन्होंने मेरी आजादी छीन ली थी
और फिर
साँस तक लेने पर भी हांफती हुई मैं
लोहे की सलाखों से घिरी थी

यह तब भी ठीक था,
उससे, जब कि उन्होंने
मुझसे मेरी बच्ची को छीन लिया था
उस दिन
सब कुछ , मेरा भविष्य तक , दूर चला गया

आप कह सकते हैं कि मेरी जिन्दगी में काफी कुछ घटा

फिर भी मैं उस दिन को याद करती हूँ
जब सेना ने मेरे देश को
सलाखों के पीछे ढकेल दिया था
लेकिन उस दिन मुझ में जबरदस्त ताकत आई
और डर चला गया

यही शुरुआत थी



(एलिसिया पार्टनोई की अन्य कविताएं) 


क्रिस्टीना पिकोज की कविता ( Polish poet from USA)

घर वापिसी*


1

जमीन भूल गई उसे,
बच्चा ही तो था वह
जब घर छोड़ कर गया, सेब का दरख्त
जिसे लगवाने में उसने मदद की थी
फलने को तैयार है, फिर से
करीब साठ फसलों के बाद,
उसके जाने के बाद की

आर्किड को भी याद नहीं कि
कितनी नाजुकता से
उसने जड़ों के पास की गन्दगी
साफ की थी, और
झुक कर टेड़ी हुई डाल के करीब
हौले से मिट्टी थपथापाई थी

दरख्तों को याद है केवल कलियाँ
और उनका खिलना, फल
और फसल, फिर सर्दी के मौसम में
एक गहरी लम्बी नीन्द

केवल उसे ही याद है उसकी
वह जो सबसे बूढ़ी है, बहुत कम बताती है
उसके काम से भरे लम्बे दिन
काम, काम।

सेब झड़ कर सड़ रहे हैं,
काम बढ़ गया है, चुनना और पकाना
आधे दिन तक आग सुलगाना,
फिर असन्तुष्ट नीन्द।


(क्रिस्टीना पिकोज की अन्य कविताएं)


जेहन्ने डरब्यू (Jehanne Dubrow)


हमेशा सर्द , पोलेण्ड

1

हमने एश चिड़या के बारे में सुना है
जो जून में चौपालों के ऊपर मण्डराती हैं,
पर उड़ान नहीं भरती, लेकिन किंकियाती हैं
इसकी पहचान है कटार सी चौंच
गले तक कीड़ों से भरी होती है
इसकी चीख नदी के
उस पार से आती है
यह खानाबदोशों की पसन्द है
जो क्स्टिल ग्लास नही रखते
पिता हृदयघात से मर से चुके थे
मुहरों से भरा मखमली बटुआ खो गया
बाररूम की बाते अफवाहें बन
सड़कों पर खून बहने लगा
चीख पुकार के बाद हम
पेड़ के नीचे घिसटते आए
वृक्ष की छाया की छत्रछाया में
परों जैसे पत्तों के बीच दम घुटते हुए।

(जेहन्ने डरब्यू की अन्य कविताएं)


हेलेन दावर की कविता ( HELEN DWYER)


तुम्हारे दफनाने जाने की
अगली सुबह जब मैं उठी
तो पहली चीज जो मैने देखी
वे मेरे जूते थे

बरसात ने कब्र खोदने वालों का काम
आसान कर दिया था, तुम किसी को
परेशान करना ही कहाँ चाहते हो
शायद मैं भी उन्हे जल्द माफ कर दूँ
काम पाने के लिए गिद्ध की तरह
ताक लगाए उन लोगों को

कुछ औरते मुझे कब्र से दूर ले गईं
पर वे कहाँ दूर कर पाई मुझें पीड़ा से

मै्ने अविश्वास से चुपके रहना चाहा
सच पर अविश्वास, लेकिन
वह मिट्टी, तुम्हारी मिट्टी
आज भी मेरे जूतों पर चिपकी है।


(हेलेन दावर की कवित
)



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