क्रिस्टीना पिकोज की कविता ( Christina Pacosz )

 
1

सूरज पार चला गया
खेतों और आलुओं ने
सफेद माँसपेशियों को ढीला छोड़ दिया
गीले खेतों में।

2

मेरे पिता एक दूसरी जिन्दगी को याद करते हैं
एक जो तन्दूर में जला दी गई
एक जो जमीन में दफना दी गई

कौन शोक मनाता है यहूदियों के लिए?
भुला दिए गए लोग, विदेशी
जो ईसा को नहीं पूजते
लेकिन इंतजार करते रहे उसका
जब तक वे खुद ही मिट गए

मेरे पिता भी इंतजार करते हैं
सोचते हैं कि, काश वे भी यहीं रहते
और मर सकते उनके साथ
वे जो दूकानदार,
लाल सिर वालीं औरतें
और बच्चे, बतखें और बकरियाँ चराने वाले।

* पोलेण्ड में

---
डा जानस्ज कोर्जाक के लिए
जो डरे नहीं गाने से


पंक्ति के
अन्त में
उन्हें मालूम था, कि
क्या करना है

बच्चों को साथ लिए
बाक्स कार से
निकल कर
वे चलते हुए
पहुँच गए गेस चैम्बर में

गाते हुए

स्मृति अवशेषों के स्वभाव के बारे में

बहुत कम
बहुत देर से

दो औरतें, एक पियानों, एक घड़ी

शहर के छोटे से फ्लैट के
सामान से अटे एक कमरे में एक पियानों है

जब भी वह उसे बजाती है
वह घंटों याद करती है
स्कूल में ड्रिलिंग स्केल्स को

गाँव में अक घड़ी है
जो एक छोटे से घर में बजती है

हर बार, जब वह कुर्सी पर चढ़ती है
घड़ी में चाभी भरने को
वह याद करती है सूअरों को
जिन्हें उसे खरीदना है
पालने के लिए।
3
एक खत जो कभी भेजा नहीं गया

मैं समन्दर से कोई सौ किलोमीटर दूर त्रिकोण के कोण में रहती हूँ जो युनाइटेड स्टेट के पश्चिमी किनारे पर है। मैंने नक्शे में देखा कि तुम चारों तरफ से बन्द जमीन में रहते हो जो Gdynia और Gdansk के बन्दरगाह से काफी दूर है।

इधर मै खरपतवार की खुशबू से जागती हूँ। कुछ दिनों से सूरज कोहरे से लिपट कर रहा है। टेलीफोन के खम्भों के ऊपर कौए काँव काँव कर रहे हैं। दुपहरी का पहला पहर है और गुलें हवा में खिलवाड़ करती हुई घर की छत पर से उड़ती निकल रहीं हैं। कभी कभी सूरज ढ़लने के बाद रात गहराने से पहले ओलम्पिक के पिछवाड़े से हेरोन (Heron) पंख फटकारते हुए पश्चिम की ओर उड़ती हुई निकल जाती है।

यहाँ स्टार्क्स नहीं होती हैं,मेरी पक्षी वर्णन किताब कहती है कि यह पुराने जमाने की प्रजाति है। तुम्हारी दुनिया, मेरे पिता की दुनिया पचास वर्ष पहले का स्मरण रखती है। अभी हाल ही में मैने नेशनल जाग्रफी की किताब में पढ़ा है कि स्टार्क लुप्त होने के कगार पर है। क्या कभी तुमने सोचा कि क्या नहीं है?

मौसम कैसा है? पिछली जुलाई में मिले आण्टी के खत में मार्च के महिने में बाढ़ और फसल के नष्ट होने के बारे में लिखा था , हमने उस खबर को कई बार पढ़ा था, आखिर कार कुछ तो सूचना मिली। हालाँकि खत खुला आया था।

मैं वह सब नहीं लिख पा रही हूँ, जो सोच रही हूँ क्योंकि जानती नहीं कि क्या सच है, क्या नहीं। मैं खतों के माध्यम से रास्ता पकड़ लेती हूँ, और कल्पना करने लगती हूँ मैं बसन्त से खराब हुई पहाड़ों के ऊपर पुरानी बर्फ पर चल रही हूँ।

तुमने सर्दियों के लिए खाना जमा कर लिया ना? भंडार को प्याज और आलू से भर लिया ना? लाल और सफेद दोनो तरह के ? बरनियों में kapusta भर कर लटका लिया हैं ना। क्या अब भी तुम मीट के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है? अब लाइन लगती भी है कि नहीं? क्या अब कोई सुबह सुबह उठ के नीले आसमान के नीचे धूप मे कुकुरमुत्ते फैलाता है? और फिर चूल्हे के करीब रैक में रख कर सुखाता है? इन शब्दों के लिखे जाने तक, जिन्हें तुम कभी भी नहीं देख पाओगे।

मैं कहना चाहती हूँ कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ, पर तुम प्रश्नवाचक हो। एक पूरे साल जेल में रहने के बाद। वालेसा कहता है कि मुझे सावधान रहना चाहिए। मुझे सोचने के लिए वक्त चाहिए।

मैं उससे सहमत हूँ, लेकिन मैं सब कुछ छोड़-छाड़ कर तुम्हारे दिल में पहुँचना चाहती हूँ। भावों में बहना अच्छा लगता है, यदि इनका तुम्हारे विरुद्ध उपयोग किया जाए तो।

पूरी जिन्दगी मैं तुम्हारी ओर झुकी रही। तुम ळुबलिन (Lublin) के दक्षिण में हो, गेलिशिया (Galicia) से ज्यादा दूर नहीं, चेज तोचावा (Czes-tochowa) से करी मील दूर पश्चिम में। मुझे मालूम है कि तुम कहाँ हो, पर नहीं जानती कि वहाँ तक कैसे पहुँचे? नाम लेने में मन को आराम मिलता है, पर इतना ही तो काफी नहीं।

मैं बचपन के दिनों की याद करते हुए उन खतों को याद करती हूँ जिनमें विदेशी भाषा में कुछ लिखा था। उसका जवाब-अच्छे कच्छों का पेकेट , गरम जुराब, नायलोन, लिप्सटिक, टिन फूड, आदि। उस ने सीटी बजाई मानों कि यह काम उसका हो। फिर उसने सफेद आटे की बोरी उन डिब्बों के चारो तरफ लपेट दी, और पुराने कपड़े से खाल की तरह कस कर बाँध दिया। इसके बाद सूजा लेकर अच्छी तरह से सी दिया आधी उंगली रहित अकड़े हाथों से उसने स्याही की बोतल निकाली, जिसे उसने इसी काम के लिए सहेज कर रखा था, फिर स्याही में निब डुबों कर तुम्हारा पता लिख दिया। सफेद पर काले अक्षर, हर अक्षर ने जरूरत से ज्यादा समय लिया।

मुझे लगता है कि मैं अपने बारे में लिखाने की जगह उसके बारे॓ ज्यादा लिखा रहीं हूँ, किन्तु उसका प्यार तुम्हारे और मेरे प्यार के आसमान के बीच का पुल था। मैं और क्या कह सकती हूँ, मैं एक अधेड़ औरत, एक लेखक, जैसा कि यहाँ जानी जाती हूँ, तुमसे मुहब्बत करती हूँ। पतझड़ करीब करीब खत्म हो गया, और तुम्हारी और मेरी दुनिया सर्दी के मौसम में प्रवेश कर गई।

जब तुम बेहद अंधेरे में क्रिसमस में रोटी बाँटोगे, मैं तुम्हे याद करूंगी।

अनुवाद रति सक्सेना
क्रिस्टिना पीकाज कवि, समाजसेविका और अध्यापिका हैं। आपके पिता महात्मा गाँधी से प्रभावित थे, जिसका प्रभाव आप पर भी पड़ा है। फिलहाल आप अमेरिका के केंसास सिटी में बच्चों को पढ़ाती हैं। आपकी अनेक कविता पुस्तकें हैं, ये कविता "This is not a place to sing" नामक पुस्तक में से ली गई हैं, इन कविताओं में पिता के पैतृक स्थल पोलेण्ड और उससे जुड़ी स्मृतियाँ हैं जिन्हे कवयित्री ने तब गहरा महसूस किया जब उन्हें अतिथि कलाकार के रूप में वहाँ काम करने का मौका मिला। इन कविताओं का अनुवाद कृत्या के लिए रति सक्सेना ने किया है।

 

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