जेहन्ने डरब्यू (Jehanne Dubrow)

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शादी से पहले , वधु का घूंघट उठाया जाता है
यह बताने के लिए कि यही वह पत्नी है
जिसका उसके पति ने सौदा किया था
फिर पादरी एक खेल खेलता है
- लेहा रचेल के लिए-
मानों कि सारी लड़किया अदलाबदली की गई हो
एक दागदार फल का सौदा
एक घायल काले के साथ

सच यह है कि - चेहरा छिपा ही रहता है
चाहे घूंघट किता ही पारदर्शी क्यों ना हो
सिल्क फुसफुसाहट सी मुलायम हो
शादी के बिस्तरे पर, सफेद किनारी
धागों और अकेलेपन से बुनी हो
हम हमेशा पर्दे में होते है, यहाँ तक कि
चादर के नीचे भी, हमारी खाल हमारे भीतर के
हजारो कोषों को ढंकने वाली एक परत ही तो है

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हर औरत को यह जानने के लिए
मैच मेकर की जरूरत नहीं कि
उसका दिल बिस्तरे के नीचे
कितनी गोलाई में दबता है
इतनी जोर से दबता हुआ कि
मैं वहाँ रखती हूँ
अपने खून का तम्बई स्वाद
मेरे हाथ कितनी आसानी से
खोज लेते हैं खाल का झुरमुट
अक्ष और सटकनी
मैं इन्हें किताब के पन्नों में
रख लेती हूँ, फूलों की तरह सीधे,
जैसे कि सुगन्ध
यह बैंगनी सपना है
जो एक खुले मैदान में,
काफी तेज दौड़ रहा है

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मेरी पौरो की याद है?
उन्होंने शब्दों को पकड़ना सीख लिया है
दायाँ कान मैदान जा पहुँचा और विस्तुला
सुनने लगा, बायां कान
मेरी माँ के वंश (shtetl) में जा गिरा, अब पूरब के
कार्यक्रमों में मिट गया है
दसों उंगलियाँ छोटी चाभी में
बिखर गई हैं,
तीखी मिर्च रोमानियत की सीढ़ियों पर
मेरी नाक चारागाह में गिरती है
आलू स्वरों और गोभी व्यंजनों
को सूंघते हुए,
और क्या बचा, मेरी आँखे, वे भूत की बड़े
जहाज पर फड़फड़ाती हैं
उन बगीचों में जहाँ वे पालते हैं
बैंगनी रंग की खाल वाले फल
काली पलके मण्डराती है
मेरे दिल के बारे में मत पूछो
यह अपनी धड़कनों को हर जगह फैलाता है
लेकिन अपने में नहीं, बल्कि उन सब जगहों पर
आराम को अनुभव करते हुए।

5

यह देश गुड़िया घर है
बिर्च पेड़ के डिब्बे पर
दिलों से सज्जित, चेस्टनट के
के फलों को तोड़ते हुए दिखाना
बचपन का चर्च
जहाँ कोई भी उजाले में नहीं आता
काँच की आँख वाले की मौत पर
शृद्धा सुमन का अर्पण
चन्दा इक्कट्ठा करने का डिब्बा
एक खाली हाथ, हजारों बारीक कतरने
से बर्फ का रूप निर्माण
इक्कम दुक्का (Hopscotch)खेलती धरती धरती, मैं बच नहीं पाती हुँ
मैं उस राख से ऊपर नहीं उठ पाती
जो मेरी स्मृति में पहाड़ों की तरह खड़े हैं
अपने मुँह की भरणी को
भरते हुए


(पहला संस्करण )


दुनिया के इस गुड़िया घर में
एक डिब्बे के भीतर
दरख्त समा जाते हैं
एक पूरी जिन्दगी बस जाती है
बचपन नन्हेपन का चर्च है
एक भूला बिसरा खिलौना
इक्कम दुक्का (Hopscotch) धरती राख है
हजारों कागजी कतरने
कंकड़ों से बना पहाड़
एक ऐसा खेल है
जिसमें कूदा और पार किया जाता है।

(दूसरा संस्करण)


अनुवाद रति सक्सेना
जेहन्ने डरब्यू का कविता संग्रह हैHardship Post (Three Candles 2009), उनका दूसरा और तीसरा संग्रह Washington Writers' Publishing House and Northwestern University Press से है। हिन्दी पाठक के रूप में हम इन कविताओं में पोलकों का अन्तर्द्वन्द्व देखते हैं, जिसे वहाँ के निवासियों ने सदियों तक झेला है। हर विश्व युद्ध ने कुछ ना कुछ खोया है, कभी अपनी अस्मिता तो कभी जमीन। इनमें से कुछ कविताओं में स्त्री दर्द भी झलकता है, जो यूरोप में भी अज्ञन के अंधेरे पन में रहने को मजबूर की गईं।

 


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