हमारे अग्रज

ज्‍बीग्‍न्‍येव हेर्बेत -Zbigniew Herbert

 

 

वर्तमान यूक्रेन में जन्‍में कवि, निबंधकार, नाटककार और अनुवादक थे। उनका नाम 20 वीं सदी के महानतम कवियों में गिना जाता हैं।

 

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एक दरार! सम्राट नींद में चिल्लाता है, और शुतुरमुर्ग के पंखों की छतरी कांपने लगती है। राजमहल के गलियारों में बिना म्यान की तलवार लिए घूमते सैनिक समझते हैं सम्राट को सपने आते हैं कि उसे घेर लिया गया है।

दरअसल अब सम्राट लकड़ी की दीपक बन गया है, जो बचे खाने की तलाश में दौड़ता फिरता है। में सम्राट अब एक लकड़ी की जूं है जो भोजन के अवशेषों की तलाश में फर्श पर इधर-उधर भागती रहती है। अचानक वह देखता है कि एक विशाल पैर उसे कुचलने जा रहा है। सम्राट दीवार में दरार की तलाश में है कि घुस कर बैठ सकें। फर्थ चिकना और फिसलन भरा है।

जी हां ,सम्राट के सपने से ज्यादा साधारण और कुछ नहीं है।

 

हमारा डर

 

हमारा डर
नहीं पहनता है नाइट शर्ट
नहीं है उसके उल्लू सी आँखें
नहीं उठाता है ताबूत का ढ़क्कन
नहीं बुझाता है मोमबत्ती

मरे आदमी का चेहरा भी नहीं है

हमारे डर
जेब में मिला
कागज का पुर्जा है

रात्रि शर्ट नहीं पहनता
उल्लू की आंखें नहीं होतीं
ताबूत का ढक्कन नहीं उठाता
मोमबत्ती नहीं बुझती

किसी मरे हुए आदमी का चेहरा भी नहीं है
“वॉजिक को चेतावनी दें
डलुगा स्ट्रीट पर जगह गर्म है’

हमारा डर
तूफ़ान के पंखों पर नहीं उठता
चर्च टावर पर नहीं बैठता
यह व्यावहारिक है

हड़बड़ी में बनाए गए बंडल सा
आकार है इसका
गर्म कपड़ों और
हथियारों के साथ

हमारा डर
किसी मृतक का चेहरा नहीं है
मृत हमारे लिए मुलायम हैं
हम उन्हें अपने कंधों पर उठाते हैं
एक में नीचे सोते हैं

उनकी आँखें बंद करो
उनके होठों को ठीक करो
एक सूखी जगह खोज कर
और उन्हें दफनाओ

बहुत गहरे नहीं
बहुत उथले नहीं

 

माँ की याद में

 

और अब उसके सिर पर जड़ों के भूरे बादल हैं
रेत ढ़ूहों पर एक पतली लिली
जब वह एक नाव की बोतल पर तैरती नीहारिकाओं के बीच

एक मील आगे जहाँ नदी मुड़ती है
लहरों पर रौशनी सी दृश्य-अदृश्य

 

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