क्रिस्टीना पेकोज (Christina Pacosz) (सारी कविताओं का अनुवाद रति सक्सेना ने किया)   क्रिस्टीना पेकोज एक कवयित्री, समाजसेविका और अध्यापिका थीं। उनके पिता महात्मा गांधी से प्रभावित थे,
जॉन मिनज़ेस्कीअनुवाद रति सक्सेना मेरा नाम(विक्टर कोंटोस्की के लिए) मेरा नाम 1910 में पोलैंड से आया, औरएक स्विस मालवाहक जहाज़ के इंजन कक्षमें छिपा कर रख दिया
जोन गुजलास्वकी सभी कविताओं का अनुवाद रति सक्सेना पोलिश डायस्पोरा की कविता नामक पुस्तक में संकलित   जोन पोलिश डायसपोरा के महत्वपूर्ण कवि हैं, माता पिता से प्राप्त जानकारी
पोलिश साहित्य अपने आप में महत्वपूर्ण रहा है। इस साहित्य ने दो नोबेल पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार दिए हैं: 1980 में ज़ेस्लॉ मिलोज़ (Czeslaw Milosz
विस्लावा शिम्बोर्स्का (Wislawa Szymborska)   सभी कविताओं का अनुवाद रति सक्सेना पोलिश डायस्पोरा की कविता नामक पुस्तक में संकलित   विस्लावा शिम्बोर्स्का दूसरी पोलिश साहित्यकार हैं, जिन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त
कृत्या की कल्पना 2005  में साकार हुई थी, हालांकि कविता पत्रिका की जरूरत बहुत पहले से अनूभूत हुई थी। यह वह दौर था, जब भारत
निपट निरंजन की वाणी   महाराष्ट्र की नाथ परम्परा में निपट निरंजन का बड़ा नाम है, नाथ कवियों की वाणी में सूफी कवियों के समान जीवन के
सुदीप एक खूबसूरत कलाकार हैं, और मंच पर बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति देने में कुशल हैं, इस बात का परिचय मुझे 2013 में कृत्या  फेस्टीवल के
समकालीन कविता में दुनिया के दो अलग छोरों से तीन कवयित्रियों की कविताएं प्रस्तुत हैं। यह समकालीन कविता की विशेषता है कि महिलाएं देश-दुनिया की
किंशुक शिव   धार्मिकता के अतिरेक ने साहित्य से दार्शनिकता को छीन सा लिया है। जीवन केवल वही नहीं जो दिखाई देता है, बल्कि वह भी है