फलीहा हसन (इराक) अनुवाद बृजेश सिंह   स्टालिनग्राद मैंने कुछ पलों के लिए उन जंगलों की आस की, जो मेरे लिए ही उगे हों,मैं ख्वाब में उन्हें सहलाते हुए,
चण्डीदास चण्डीदास बंगाल की अप्रतिम भक्त कवि परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे जयदेव के समकक्ष लोक मन में काव्य प्रेम को जागृत करने में समर्थ
दुनिया का चक्कर लगाने सेदुनिया के अंत तक नहीं पहुँचा जा सकता हैलेकिन अंत तक पहुँचे बिनादुनिया के दर्दों से छुटकारा भी तो नहींतभी तो
राजेंद्र नागदेव   पानी   बुद्ध! तुमने अछूत कन्या के हाथ से पानी पीया था क्या तुम नहीं जानते थे पानियों की भी जातियाँ होतीं हैं? जानते थे बुद्ध! तुम्हारी प्यास केवल
हशम तुरबी काम हम करते हैं सदियों से रईसों के लिये , कब पहनने को भला हमको मिला रेशम है। इन पंक्तियों के रचयिता, रेशम के ताने में
विलियम बटलर येट्स की कविताएँ अनुवाद चन्द्रशेखर शर्मा विलियम बटलर येट्स को 20वीं सदी के महानतम कवियों में से एक माना जाता है। वे उस प्रोटेस्टेंट, एंग्लो-आयरिश
फिलिप निकोलेव (Philip Nikolayev)   अनुवाद बृजेश सिंह   आइए, और ज़्यादा एहतियात बरतें   मुट्ठी भर सस्ती ब्लूबेरियां अपनी हथेली में धोते हुए, मुझे भान था कि मैं पूरी एहतियात बरत रहा
पवन पटेल 1.मेरी बेटियों तुम्हारी शाश्वत नियति है तुम पे नोंच खसोट के निशाननहीं हैं सीमितमात्र बच्चेदानी से उपजीसभ्यता नाम की कायनात पर लम्पट सरमायादारी के कैनवास रचते
अक्का महादेवी के वचन अनुवाद रति सक्सेना अक्का महादेवी कन्नड़ साहित्य की महती विभूति हैं, १२ वीं सदी की महान कवयित्री अक्का कन्नड़ के शैव वचनकारों में
यदि हम साठ सत्तर के दशक की बात करें तो उस वक्त रात-रात भर चलने वाले कवि सम्मेलन प्रचलित थे। मुझे याद है मेरे बचपन