मेरी बात
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कृत्या का नया अंक प्रस्तुत है। कभी-कभी देह मन को सरकने भी नहीं देती और पीड़ा का अध्यात्म आत्मा को दबोच लेता है; उस वक्त किसी भी तरह का लिखना-पढ़ना असंभव सा लगता है। करीब-करीब इसी तरह की तकलीफों से गुजरते हुए कृत्या को तैयार करना सहज नहीं था।
फिर भी कृत्या का नया अंक वक्त पर तैयार हो गया, इसकी खुशी है।
इस अंक में आप यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी कविताओं के साथ-साथ कन्नड़ के प्रमुख कवि की कविताओं को पाएंगे।
आयरिश और ईरानी कवियों के साथ संवाद भी शामिल है। अह्रज के रूप में तेलुगु के कवि।
इस तरह हिन्दी में दुनिया का चक्कर लगा ही लिया है।
शुभकामनाओं सहित
रति सक्सेना