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विलियम बटलर येट्स की कविताएँ
अनुवाद चन्द्रशेखर शर्मा

विलियम बटलर येट्स को 20वीं सदी के महानतम कवियों में से एक माना जाता है। वे उस प्रोटेस्टेंट, एंग्लो-आयरिश अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखते थे, जिसने कम से कम 17वीं सदी के अंत से आयरलैंड के आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर अपना नियंत्रण बनाए रखा था। इस अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकांश सदस्य खुद को ऐसे अंग्रेज़ लोग मानते थे, जिनका जन्म संयोगवश आयरलैंड में हुआ था; लेकिन येट्स ने पूरी दृढ़ता के साथ अपनी आयरिश राष्ट्रीयता का दावा किया। हालाँकि उन्होंने अपने बचपन के 14 साल लंदन में बिताए (और अपने वयस्क जीवन के पहले आधे हिस्से के दौरान वहाँ एक स्थायी घर भी बनाए रखा), फिर भी येट्स ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजकर रखा; उन्होंने अपनी कई कविताओं और नाटकों में आयरिश लोककथाओं और नायकों को प्रमुखता से स्थान दिया। एक कलाकार के रूप में अपनी स्वयं की छवि पर अडिग रहने के मामले में भी वे उतने ही दृढ़ थे। इस दृढ़ विश्वास के चलते कई लोगों ने उन पर ‘अभिजात्यवादी’ (elitist) होने का आरोप लगाया, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि इसी बात ने उनकी महानता में भी अपना योगदान दिया। जैसा कि उनके समकालीन कवि डब्ल्यू.एच. ऑडन ने 1948 में ‘केन्यन रिव्यू’ में प्रकाशित अपने एक निबंध—जिसका शीर्षक था “Yeats as an Example”में उल्लेख किया है, येट्स ने इस आधुनिक आवश्यकता को स्वीकार किया कि किसी भी कलाकार को अकेले और सोच-समझकर उन “सिद्धांतों और पूर्वधारणाओं का चयन” करना पड़ता है, जिनके आधार पर वह अपने अनुभवों को कोई अर्थ प्रदान कर सके। ऑडन ने येट्स की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने आधुनिक काल की “कुछ सबसे सुंदर कविताओं” की रचना की है। शायद ही कोई अन्य कवि ऐसा रहा हो, जिसने येट्स की तरह—अपने जीवनकाल के दौरान और उसके बाद भी—किसी देश और वहाँ के लोगों का इतनी मार्मिकता के साथ प्रतिनिधित्व किया हो; और यही कारण है कि आज भी, संपूर्ण अंग्रेज़ी-भाषी जगत में उनकी कविताओं को बड़े चाव से पढ़ा जाता है।
राजनीति
हमारे समय में एक पुरुष की नियति राजनीतिक शब्दों में प्रदर्शित होती है।
थोमस मान
कैसे मैं
ध्यान केन्द्रित कर सकता हूँ
रोमन रूसी या फिर
स्पेनिश राजनीति पर
जब वहाँ एक षोडशी खड़ी है?
यहाँ एक यात्री
जानता है कि वह किसकी बात कर रहा है
और वहाँ एक राजनीतिज्ञ
सोच और समझ चुका है
शायद वो जो कह रहे हों
सत्य हो, युद्ध और उसके खतरे की घंटी में
काश मैं फिर जवान होता
और भींच लेता उसे
अपनी बाहों में।
बायजेनटियम
दिन के अशुद्ध प्रतिबिम्ब लौट चुके है
सम्राट के नशे में धुत्त सैनिक शय्या पर हैं
गूँज रात्रि की लौट रही है
लौट रहे हैं निशाचरों के गान
गिरिजाघर के घंटा नाद के बाद
तारों से या चाँदनी से चमत्कृत गुम्बद
घोषणा करता है मानव से
सम्पूर्ण जटिलताओं से
आवेश और शिराओं के कर्दम से।
मेरे सामने तैरता है एक बिम्ब
मानव या प्रेत।
शायद यह प्रेत है, शायद मानव
एक प्रतिबिम्ब प्रेत सा
क्योंकि नारकीय फिरकी जो लिपटी हुई है
एक प्राचीन परिरक्षित शव वसन से
शायद ढील दे देगी वह घुमावदार पथ को
आर्द्रताविहीन, श्वास विहीन
हाँफते मुख करेंगे आह्वान
मैं स्वागत करता हूँ महामानव का
मैं पुकारता हूँ उसे मृत्यु में जीवन
और जीवन में मृत्यु।
चमत्कार, पंछी या सुनहला हस्तकार्य
पंछी या हस्तकार्य से ज्यादा चमत्कारिक
रोपा गया है एक तारों से रोशन सुनहली डाल पर
वह नर्क के मुर्गे की तरह बांग लगा सकता है
या, चन्द्रमा से क्रुद्ध होकर
चीखकर करता है तिरस्कार
अपरिवर्तनशील धातु का
सामान्य पंछी या पंखुड़ी
और संपूर्ण जटिलताओं के कर्दम
या लहू का।
मध्यरात्रि में भभकती है अग्नि राहों पर
अग्नि जिसे काष्ठ के गठ्ठे जलाते नहीं हैं
ना ही कोई फौलाद जला सकता है
कोई तूफान विशुद्ध नहीं कर सकता
अग्नि जो अग्नि से ही पैदा हुई हो
जहाँ लहू से लथपथ प्रेतात्माएँ आती हैं
और छोड़ जाती हैं उत्तेजना जटिलताओं की
नृत्य में मरने लगती हैं
वेदना अचेतावस्था की
अग्नि की
जो बाल भी बांका नहीं कर सकती।
डालफिन के करदन और लहू पर पैर फैलाकर सवार
प्रेतात्मा दर प्रेतात्मा। लोहार तोड़ते हैं बाँध
सम्राट के सुनार।
संगमरमर नृत्य मंच का
तोड़ता है जटिलताओं की कड़वी उत्तेजना
वे प्रतिबिम्ब नये प्रतिबिम्बों को जन्म देते हैं
डालफिन द्वारा चीरा हुआ
घंटनाद से सताया हुआ समुद्र।