कविता के बारे में
जोन गुजलास्वकी
सभी कविताओं का अनुवाद रति सक्सेना
पोलिश डायस्पोरा की कविता नामक पुस्तक में संकलित
जोन पोलिश डायसपोरा के महत्वपूर्ण कवि हैं, माता पिता से प्राप्त जानकारी के आधार पर लिखी गई कविताओं में जोन बुकनवेल्ड Buchenwald नाजी कन्सेन्ट्रेशन केम्प और विस्थापन के दंश को भोगते पोलिश समाज के दर्द की तीव्रता को जिस तरह से जोन प्रकट करते हैं, वह अचंभित करता है। उनकी कविताएं और नोट्स मानों कैम्प की एक एक घटना के दस्तावेज हैं। समकाल में उनकी कविताओं का स्वर भी बदला है।
उनकी मां तेक्ला हैंज़ारेक Tekla Hanczarek तत्कालीन पोलैंड (आधुनिक ल्वीव Lviv, यूक्रेन) के ल्वो (Lwów )के पश्चिम में स्थित एक छोटे से समुदाय से थीं, जहां उनके पिता वन विभाग में वार्डन थे। जॉन के पिता जान का जन्म पॉज़्नान (Poznań)के उत्तर में एक कृषक समुदाय में हुआ था। जॉन का जन्म 1948 में जर्मनी के विएनेनबर्ग में एक विस्थापनों के शिविर में हुआ था, बचपन में उनका नाम ज़बिग्न्यू गुज़लोस्की के रूप में हुआ था। 1968 में जब उन्हें अमेरिकन नागरिकता प्राप्त हुई, उन्होंने अपना नाम जॉन रख लिया। उनका परिवार 1951 में अमेरिका उनके माता-पिता, उनकी बहन डोना और वह 1951 में शरणार्थी के रूप में अमेरिका आए थे। अमेरिका जाने के लिए जो धन राशि लगी थी, उसे चुकाने के लिए पश्चिमी न्यूयॉर्क राज्य में खेतों पर उनके माता पिता ने बहुत मेहनत की, इसके उपरान्त उनका परिवार शहर के पुराने पोलिश डाउनटाउन के आसपास शिकागो में बस गया।
अत्यधिक मेहनत और कनसन्ट्रेशन कैम्प में पाए दंश के कारण उनके पिता अत्यधिक शराब पीने लगे, वे तब तक पीते, जब तक होश न खो बैठते। इसके अलावा उनमें कोई दोष नहीं था। उनकी मां शराब से बेहद नफरत करतीं थीं। वे अपने पति को गालियां देतीं, और कभी कभी झाड़ू से पीट भी देतीं। मेहनत उन्हें क्रूरतम बनाती जा रही थी। इस तरह शराबी पिता और क्रुरता की हद तक कठोर मां के बीच जोन का बचपन बीता।
पिता जब पी लेते तो कन्सेन्ट्रेशन केम्प में मिली यातनाओं के बारे में बोलने लगते, जो भी सामने हो उसे सुनाने लगते कि उन्हें कब और कैसे पीटा जाता था। वे पोलेंड के महान जनरल Sikorski और Anders के बारे में बताने लगते, जर्मनों ने पोलेंड और वारसां के सा् क्या किया यह भी बताने लगते। वे युद्ध गीत गाने लगते , खास तौर से वह गीत, जिसमें वर्णित है कि जिस युद्ध के मैदान में पोलिश सैनिक मारे गए, वह कैसे लाल रंग के पॉपी फूल खिल उठे। वे अपने साथ फांसी के तख्ते पर चढ़ाते कुछ पोलिश लोगों की तस्वीर रखते जो हर किसी को दिखाने लगते। वह घंटो माथे पर लगे घाव के निशान पर बात कर सकते थे, या फिर अपनी आँख के बारे में जो बन्द ही नहीं हो पाती थी। वे अपनी भूख के बारे में बताने लगते , जिससे बचने के लिए अपने मुंह में कागज आदि रखे रहते थे। लेकिन उन्होंने नाजी द्वारा दिए गए उस सूप को पीने से इंकार कर दिया था, जिसमें ऐसा अखाद्य पदार्थ था, जिसे भूखा आदमी भी न खाए।
मां का स्वभाव बिलकुल भिन्न था, वे गालियां देती मारती पीटतीं, जब कि पिता गल्ती से भी हाथ नहीं उठाते थे, लेकिन मां कभी भी बीते वक़्त के बारे में बात करना नहीं चाहतीं थीं। संभवतया उनके पिता पीड़ा की यादों को कम करने के लिए पीते थे, लेकिन जितना पीते जाते। इसी महौल में पलते और इसी से कुछ सीखते जोन ने निश्चय किया कि अमेरिकन सी अंग्रेजी बोलेंगे, लिखेंगे। अन्ततः पर्ड्यू विश्वविद्यालय से अमेरिकन साहित्य में पी एच डी की, पूर्वी इलिनोइस विश्वविद्यालय में साहित्य और रचनात्मक लेखन पढ़ाया और 2005 में सेवानिवृत्त हुए।
इस वक़्त जोन पत्नी लिंडा कैलेंड्रिलो और अपनी बेटी लिलियन गुज़लोव्स्की और पोती लुसी गुज़लोव्स्की के साथ लिंचबर्ग में रहते हैं।
1
वसंत ऋतु में युद्ध समाप्त हो गया।
लंबे समय तक शिविरों में युद्ध नहीं हुआ था।
मेरे पिता खेतों में काम करते थे और सुनते थे,
अनाज, या फसलों को हिलाने वाली हवा की आवाज़,
दूर से कोई आदेश चिल्ला रहा है,
या कोई आदमी मर रहा है।
पतझड़ में, मेरे पिता ने गड़गड़ाहट सुनी,
अमेरिकी विमानों की सरसराहट,
एक ऐसी गड़गड़ाहट जो इतनी तेज़ थी, जैसे
स्वर्गदूत आकाश को चीर रहे हों,
यहाँ तक कि स्वर्ग में भगवान को भी सुनना पड़े।
वसंत के एक दिन उन्हें पता चला कि युद्ध होने वाला है।
बैरक के दरवाजे पर एक सिपाही खड़ा था,
एक अमेरिकी, एक लड़के की तरह छोटा और डरा हुआ,
और मेरे पिता उसकी जवानी के जोश को देखकर आश्चर्यचकित थे,
और उसका हाथ पकड़कर उसे गले लगाया और उससे कहा,
कि वह उससे और उसकी माँ और पिता से प्यार करता है,
और वह उसके बच्चों के लिए प्रार्थना करेगा,
कि उसके देर से आने के पाप को माफ कर दिया जाए।
2.
मेरी माँ 19 साल की थीं।
न जाने कहाँ से सैनिक
मेरी माँ के खेत में आए।
उसकी बहन जेनजा के बच्चे को
अपने जूतों की एड़ी से कुचलकर मार दिया,
उसकी माँ को भी गोली मार दी,
पहले गर्दन में,
फिर चेहरे पर लात मारते हुए।
उन्होंने मेरी माँ को देखा,
वे बेपरवाह थीं,
कुंवारी थीं,
छोटे सफेद फूलों वाली,
नीली पोशाक पहने हुए।
सैनिकों ने उनके साथ बलात्कार किया,
इसलिए वह खड़ी नहीं हो सकीं,
लेट भी नहीं सकीं,
बात भी नहीं कर सकीं।
उन्होंने उनके दांत तोड़ दिए,
नीली पोशाक उनके मुँह में ठूँस दी।
यदि उनके पास कैमरा होता तो वे
उनकी तस्वीर भी ले लेते।
वे ऐसे ही थे।
वर्षों बाद, माँ ने कहा,
भगवान न कुछ भला करता है,
न ही कुछ देता है,
वह यह भी नहीं कहता,
कि कल तुम्हारे साथ बुरा हुआ,
तो अब तुम्हारे साथ भला होगा।
सब बकवास है।
3.
मेरी माँ को नहीं पता था कि हिटलर ने
खुद को कैसे मारा, और उन्हें परवाह भी नहीं थी।
वे खुश थीं कि हिटलर मर गया,
हालाँकि वे उससे कभी नहीं मिली थीं,
लेकिन अपने चेहरे पर मुक्कों और
पीठ पर चाबुक की मार को उन्होंने महसूस किया था।
अपनी माँ, अपनी बहन जेनजा और
जेनजा की बेटी की हत्या देखने के बाद,
उन्हें गुलाम मजदूर के रूप में जर्मनी ले जाया गया।
मेरी माँ की बहन सोफ़ी के साथ भी बलात्कार हुआ था।
मेरी माँ खिड़की से कूदकर जंगल में भाग गईं,
लेकिन नाज़ियों ने उन्हें पकड़ लिया।
मेरी माँ ज्यादा बात नहीं करती थीं
कि उनके और उनके परिवार के साथ क्या हुआ था।
जब मैं छोटा था, तो मुझे लगता था कि
उनकी चुप्पी युद्ध के बारे में मेरे सवालों से
उपजी झुंझलाहट के कारण है।
बाद में, मुझे एहसास हुआ कि
माँ ने अपने अनुभवों के बारे में बात नहीं की,
क्योंकि वह मुझे उन भयानक चीजों से
बचाना चाहती थीं जो घटित हुई थीं, भले ही मैं
एक वयस्क और एक शिक्षक बन गया था।
4.
मेरी माँ की मरती हुई माँ
के पास कीट्स के गीतों जैसी
खूबसूरत जायदाद नहीं थी,
न ही वह अछूती दुल्हन
मेरी माँ ने देखी थी।
अपनी माँ का लहूलुहान चेहरा,
कभी उनकी आँखों में नहीं झाँका,
अलविदा भी नहीं कहा।
जर्मन सैनिकों ने माँ की माँ के साथ
बलात्कार किया, चेहरे पर गोलियाँ चलाईं,
और लातें मार दीं। वे सैनिक,
जिन्होंने ऐसा किया, न तो मनुष्य थे
न ही भगवान। उन्होंने न तो
खुशी के गीत गाए, न ही वे गीत
जो कीट्स की लड़कियों ने गाए थे।
सैनिकों ने बलात्कार कर हत्या कर दी,
फिर अगले घर की ओर चल दिए,
जहाँ उन्हें महिलाओं और लड़कियों के साथ
बलात्कार करना था, और जब उन्होंने
बलात्कार कर उनकी भी हत्या कर दी,
तो सैनिकों ने वह गीत गाया जो उन्होंने सीखा था
जर्मनी के बियर हॉल में,
लिली नाम की एक युवा लड़की के बारे में,
जो लैंप की रोशनी के नीचे खड़ी
युद्ध में मारे गए अपने प्रेमी के वापस लौटने का
इंतज़ार कर रही है।
इससे ज्यादा कहने को है क्या
मेरी माँ के बारे में कि उन्होंने क्या देखा
और क्या नहीं भुला पाती हैं।
बीते वर्षों में कंटीले तारों की बाड़
के पीछे लड़कियों को पीट-पीटकर मार दिया गया,
बच्चों को दीवारों पर पटक-पटक कर मार दिया गया।
कीट्स ने कहा था, “सौंदर्य ही सत्य है,
सत्य ही सौंदर्य है” और बस इतना ही।
यदि यह मेरी माँ ने पढ़ा होता,
तो उन्होंने सिर हिलाकर मना कर दिया होता,
और कहा होता, “सत्य तो सत्य ही होता है,
सच्चाई में कोई सुंदरता नहीं है।”
5.
आज जिप्सी जल रहे हैं।
उनका मरना कुछ भयंकर है,
बर्फ़ीली हवा की तरह,
जैसे कि भेड़िये
अपनों की मौत से
क्रोधित हो रहे हों।
उनके गीत हवा में उठते हैं,
उनके लाल और नारंगी स्कार्फ
और इंद्रधनुषी शॉलें
गैसोलीन की लपटों के भँवर में
घूम रहे हैं।
मौत उन्हें रोक नहीं सकती।
वे तीर्थयात्री हैं जिन्हें भगवान की
बचाने के लिए ज़रूरत भी नहीं है,
उन्हें बचाने के लिए कोई सिक्का भी नहीं चाहिए,
समय के प्रवाह में कोई स्लेटी मूर्ति नहीं।
उनकी माँ हवा है, वही उनका सच्चा घर है।