समकालीन कविता
जॉन मिनज़ेस्की
अनुवाद रति सक्सेना
मेरा नाम
(विक्टर कोंटोस्की के लिए)
मेरा नाम 1910 में पोलैंड से आया, और
एक स्विस मालवाहक जहाज़ के इंजन कक्ष
में छिपा कर रख दिया गया
रसोइए को उस पर दया आई
रोजाना सॉसेज, बेरी, और दूध दिया
पिस्टन की आवाज और जहाज के पेंच के घूमने से
दो सप्ताह तक मेरा नाम बहरा हो गया
मेरा नाम, बिना पासपोर्ट या कपड़ों के,
बिना टूथ ब्रश या भूरे शॉपिंग बैग के,
स्टेटन द्वीप तक तैरकर पहुंचा, बमुश्किल खाना खाया
शार्क से मुश्किल से बचा, मेरा नाम अंग्रेजी नहीं जानता था.
इसे आलू के किसानों ने अपनाया और
ट्रक चलाना और बीयर पीना सीखा।
मेरा नाम एक पत्तागोभी के ऊपर फिसल गया
और उसे हैरो से आधा काट दिया गया।
इस प्रकार मेरा जन्म हुआ।
मैंने इसे वर्षों का दर्द दिया है।
मेरा नाम रोना भूल गया है
सेराफिन को एक पत्र
अनुवाद रति सक्सेना
सेराफिन, अनाथ परी,
अब बस कुछ सूअर बचे हैं
कुछ पिले चुकुन्दर, शीतकालीन गेहूं।
आपके परपोतों के लिए,
आपकी माटी की विरासत के उत्तराधिकारी,
बर्फ की तरह बोलियां विकसित करने वाले
मैं सेंट पॉल की एक बस्ती से बोल रहा हूं।
यह अक्टूबर का महिना है. मैं खुदाई या
खाद बनाने जैसा काम नहीं कर रहा हूं
कुछ भी एक जैसा नहीं रहता-
आपके घर के ऊपर एक जस्ता चढ़ी छत चमकती है;
अब किसी के पास छत पर फूस चढ़ाने का वक़्त नहीं है
फिर भी सब कुछ वैसा ही है.
परिवार ने चुकंदर इकट्ठा किया,
मशरूम का निकालने
सॉसेज तैयार कर स्वाद लेने के लिए
उन्होंने पूछा, मैं वहां क्या कर रहा हूं,
मेरी उम्र कितनी है? और चाय चाहिए?
या फिर वोदका? और सब घर का बना है
बिल्कुल घर जैसा,महसूस करेंगे
उन्होंने युद्ध से प्राप्त सामान की सूची तैयार की-
खेत में बारूदी सुरंग से एक हाथ उड़ गया ,
एक पिता जो जर्मनी से पैदल चलकर घर आया
मांस से अधिक हड्डी दिखाई दी
दिवालियापन हर जगह पर
संपत्तियां दबा दी गईं
मुंह भर बना लेने को
लोगो ने मुस्कुराहट समझ लिया
कुछ सूअर और एक गाय बची रही
उनसे चरने-उतरने के लिए थोड़ा सी जगह
जिसने तुम्हे प्यार किया, तुमने खाना किलाया
तुम जो भी थे, सेराफिन।
जॉन मिनज़ेस्की पेशे से
अध्यापक है. उनके पांच कविता संग्रह हैं, सबसे हाल ही में ए लेटर टू सेराफिन (एक्रोन प्रेस विश्वविद्यालय)। उनकी कविताएा टैम्पा रिव्यू, हार्वर्ड रिव्यू, द न्यू यॉर्कर, साइडर प्रेस रिव्यू, बियर रिव्यू में छपी हैं ।
ओरियाना आइवी Oriana Ivy
अनुवाद बृजेश सिंह
ब्लैकबेरी के वनों में
पटरियों को एक ओर से खुरचतीं
ब्लैकबेरी की झाड़ियां,
सिग्नल के खंभे के पास
जंगल में रुकी हुई रेल।
मेरे बाबू जी नीचे उतरते हैं
मेरे लिए अपनी अंजुली में
लाते हैं, धूप से कुनकुनी ब्लैकबेरी
मीठी बहुत मीठी, काली से काली।
वो मेरे लिए लाते हैं
चमकती बेरियों को,
उलट देते हैं मेरी हथेलियों में।
मैं खा रही हूँ काली धूप।
और भी तोड़ने जाते हैं बाबू जी
पर मैं जानती हूँ कि छूट जाएँगे पीछे
वो – कटीली झाड़ियों में
उनकी कमीज की झलक,
खिड़की पर मेरा खामोश
चीखता मुंह। मगर रेल
गुम हुए बाबू जी के लिए
सीटी बजाती है: वो वापस आ जाते हैं,
और मद्धिम वाल्ट्ज़ की तरह,
इधर-उधर झूमते हुए,
ब्लैकबेरी के वनों में
हम ताल से ताल मिलाने लगते हैं,
अधर रंगे हुए हैं
गुजरते बैंगनी रंग से।
अटलांटिस
हम लिपटे हैं समुद्री शैवाल के लिबास से,
वायु थैलियों के एम्बरी मोतियों से,
पानी का आवरण ओढ़े हुए
चीजों के चेहरे पर।
बलखाती मछली, इंद्रधनुषी घूँघट में।
केल्प मौन घंटियों सी डोलती है।
हम फर्क नहीं कर सकते, एक दिन
और हज़ार सालों में।
यहीं हैं हमारे ताबीज़,
मुकुट और ताज।
यहीं है हमारे देवता की नत
सिर-विहीन मूर्ति,
दया के देवता, जिसके नाम पर
हमने हत्याएं कीं। कीड़े बिल बना रहे हैं
संगमरमरी महलों में।
हमारी थैलियां गाद से भर रही हैं।
हमें याद हैं, चीड़ के जंगल
हवा में घुली राल की खुशबू।
हमें याद है किसी का
हाथ थामे रखना।
लहरों पर यह चमक
मुड़कर आती गूँज सी,
हमारे वो आखिरी शब्द:
हाथ थामे रखो। हाथ थामे रहो।
ओरियाना आइवी का
जन्म पोलैंड में हुआ था और वह 17 साल की उम्र में इस देश में आईं अमेरिका में आईं। उनकी कविताएँ, निबंध, किताबों की समीक्षाएँ और अनुवाद ‘पोएट्री’, ‘प्लाउशेयर्स’, ‘बेस्ट अमेरिकन पोएट्री’, ‘निमरोड’, ‘स्पून रिवर रिव्यू’, ‘द आयोवा रिव्यू’, ‘ब्लैक वॉरियर रिव्यू’ और कई अन्य जगहों पर छपे हैं। उनके शुरुआती कलेक्शन, ‘नो लॉन्गर माइन’ ने ‘सोज़ ईयर चैपबुक कॉन्टेस्ट’ जीता, और उनकी किताब ‘अप्रैल स्नो’ ने ‘फिनिशिंग लाइन प्रेस 2011 चैपबुक कॉन्टेस्ट’ जीता। उनकी अन्य चैप बुक्स में ‘स्टालिन्स मस्टैश’, ‘फ्रॉम द न्यू वर्ल्ड’ और ‘हाउ टू जंप फ्रॉम अ मूविंग ट्रेन’ शामिल हैं। उनके पहले पूरे कलेक्शन का नाम ‘पैराडाइज एनोनिमस’ है। पहले पत्रकार और कम्युनिटी कॉलेज इंस्ट्रक्टर रह चुकीं ओरियाना अब ऑनलाइन ‘पोएट्री सैलून’ को एडिट करती हैं और कविता और संस्कृति पर एक साप्ताहिक ब्लॉग लिखती हैं। वे दक्षिणी कैलिफोर्निया के सैन डिएगो इलाके में, मैक्सिको की सीमा के पास रहती हैं।
लियोनार्ड क्रेस
अनुवाद रति सक्सेना
अरे आनंद, “द बर्ड फ़्लू अवे”
दक्षिण भारत का कवि ज़ोर से कविता पढ़ता है, उस भाषा में
जिसके बारे में मैंने कभी नहीं सुना था। लेकिन यहाँ वारसॉ में
पोलिश भाषा में उसका अनुवाद पढ़ा एक टीवी एक्टर ने,
जिसका आखिरी रोल सॉलिडैरिटी इन्फॉर्मर था,
उसे कौन दोषी ठहरा सकता है
कि उसने अपनी चाय के गिलास में वोडका डाल दी?
उसे कई बड़े-बड़े भाषण सुनने पड़ते हैं,
उसके बाद स्टेट हायर स्कूल ऑफ़ म्यूज़िक का एक टुकड़ा
सांवली सेलिस्ट, अपनी काली बेल्ट के साथ
और अपने काले बालों को झटकती है,
फिर वे बढ़िया पोलिश संगीत बजाते हैं—
वाल्ट्ज़, माज़ुरका, पोलोनेज़ जो पुरस्कार के योग्य हैं।
पास के कमरे में, मेरी बेटी हो सकती है,
जो अपने स्विमिंग सूट को कसकर निचोड़ रही है,
जब मैं अपनी सब्जी में चीनी डाल रहा हूँ।
अब कविता में बुद्ध के प्यारे शिष्य आनंद को,
जिनके पास लकड़ी का फर्श है, एक गाँव की लड़की
कहाँ से (इसके बारे में मुझसे मत पूछो),
कुएँ से भरी बाल्टी को खाली करती है।
वह, जो आनंद के गेरुए वस्त्रों, नंगे पैरों और मुंडित सिर के प्यार में पड़ गई,
रोती हुई कहती है, “मेरे प्यार से बढ़कर क्या होगा? आनंद, अपना प्रण तोड़ दो!”
वह कंधे पर रखे बांस पर दोनों बाल्टियों को
संतुलित करने की कोशिश करती है,
आनंद पीछे मुड़कर भी नहीं देखता,
मंत्र जपते हुए चल देता है,
एक चिड़िया उड़ जाती है।
लियोनार्ड क्रेस ने
चार किताबें प्रकाशित की हैं, जिनमें सबसे हालिया ‘द ऑर्फीयस कॉम्प्लेक्स’ (मेन स्ट्रीट रैग) है। उन्होंने एडम मिकिविज़ की ‘पैन टैड्यूज़’ का अनुवाद भी किया है। वे ओहियो के ओवेन्स कॉलेज में दर्शनशास्त्र, धर्म और क्रिएटिव राइटिंग पढ़ाते हैं।
माजा ट्रोचिमज़िक MAJA TROCHIMCZYK
अनुवाद बृजेश सिंह
क्या साथ लेना होगा
उसकी माँ ने कहा,
कि पता नहीं युद्ध कब शुरू हो जाए,
तुम्हें तैयार रहना चाहिए।
अधिकतर चीज़ें गैर-ज़रूरी हैं।
तुम्हें साथ लेने होंगे, अपना स्वर्ण और पारिवारिक आभूषण।
हीरे से तुम भोजन खरीद लोगे।
स्वर्ण तुम्हारा जीवन बचा लेगा।
चाँदी को भूल जाओ, बहुत वजनी होती है।
मजबूत जूते और दो जोड़ी मोज़े ले लो,
हंस के परों वाली गर्म रज़ाई पीठ पर रख लो,
सिर्फ एक तस्वीर, कोई किताबें नहीं। सब कुछ छोड़ दो।
तुम्हें पैदल चलना होगा, गड्ढे में सोना होगा, फिर चलना होगा।
हल्का फुल्का सामान ले लो। तुम जो साथ ले जाओगे, वही रक्षा करेगा।
भूख से, सर्दी से। यही सब मायने रखता है।
हंस के पंख और स्वर्ण। भूख और बर्फ़।
उसके पास अब भी है, हंस पंखों वाली अपनी रज़ाई
जो कैलिफ़ोर्निया में किसी काम की नहीं है।
उसकी माँ ने उसे सूटकेस में ठूंसा था
जब वो पहली बार घूमने आई थीं।
दशकों पहले ये पंख बीलेविज़े में
हंसों से निकाले थे, उसकी दादी नीना ने।
हीरे? उसने अपनी अंगूठियाँ बेच दी थीं
ताकि तलाक़ का खर्च उठा सके,
अनार और संतरे के पेड़ों वाला घर बचा सके,
उसके जूते अब किसी काम के नहीं रहे –
अलमारी में सजी ऊंची ऐड़ी वाले जूतों की इन्द्रधनुषी कतार।
पहली बार The Rainy Bread: Poems from Exile (2016) में प्रकाशित
चाबी के लिए एक गीत
– टोमाज़ कुबा कोज़लोव्स्की और उनकी माँ के लिए
यह एक चाबी है।
यह एक लोहे की चाबी है।
यह एक बड़ी, लोहे की चाबी है।
यह एक पुरानी, बड़ी, लोहे की चाबी है।
जिसे मेरी माँ अपने पर्स में रखती थीं।
यह मेरी माँ की पुरानी, बड़ी, लोहे की चाबी है।
वह इसे हर दिन अपने पर्स में रखती थीं।
यह एक खेत है।
यह एक समतल खेत है।
यह एक समतल, खाली खेत है।
यह यूक्रेन में एक समतल, खाली खेत है
यह कभी पोलैंड था। एक समतल, खाली खेत
जहाँ कभी मेरी माँ का घर हुआ करता था,
चारों ओर एक ऊँची लकड़ी की बाड़ और ऊँचे लकड़ी के गेट से घिरा था,
जिसमें एक मज़बूत, बड़ा लोहे का ताला था।
उन्होंने उससे कहा: सामान समेट लो!
उन्होंने उससे कहा: चले जाओ !
उन्होंने उससे कहा: बाहर निकलो!
यह हमारी ज़मीन है।
घर चला गया।
बाड़ चली गई।
गेट चला गया।
यह एक चाबी है
पहली बार The Rainy Bread: More Poems from Exile (2021)में प्रकाशित
माजा ट्रोचिमचिक,
पीएच.डी. एक पोलिश-कनाडाई-अमेरिकी कवयित्री, संगीत इतिहासकार, फ़ोटोग्राफ़र और non-profit संस्था की निदेशक हैं। पोलैंड में जन्मीं डॉ. माजा वर्तमान में कैलिफ़ोर्निया में निवास करती हैं।
उनके अब तक ‘रोज़ ऑलवेज़’, ‘स्लाइसिंग द ब्रेड’ और ‘ब्राइट स्काइज़’ सहित छह कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, और उन्होंने पाँच प्रतिष्ठित कविता संकलनों (anthologies) का संपादन किया है।
साहित्य के क्षेत्र में उनका अत्यंत विस्तृत योगदान है। उनके सैकड़ों लेख और कविताएँ मूल रूप से अंग्रेज़ी और पोलिश में प्रकाशित हुई हैं, परन्तु जर्मन, फ़्रेंच, चीनी, स्पेनिश व सर्बियाई भाषाओं में उनका अनुवाद भी हुआ है। उनकी रचनाओं को दुनिया भर की दर्जनों प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं और संकलनों में स्थान मिला है।