प्रिय कवि
क्रिस्टीना पेकोज (Christina Pacosz)
(सारी कविताओं का अनुवाद रति सक्सेना ने किया)
क्रिस्टीना पेकोज
एक कवयित्री, समाजसेविका और अध्यापिका थीं। उनके पिता महात्मा गांधी से प्रभावित थे, जिसका प्रभाव उन पर भी पड़ा। फिलहाल वे अमेरिका के कंसास सिटी में रहती हैं; वे बच्चों को पढ़ाती भी थीं। उनकी अनेक कविता पुस्तकें हैं; यह कविता “This is not a place to sing” नामक पुस्तक में से ली गई है। इन कविताओं में पिता के पैतृक स्थल पोलैंड और उससे जुड़ी स्मृतियां हैं, जिन्हें कवयित्री ने तब गहराई से महसूस किया जब उन्हें अतिथि कलाकार के रूप में वहां काम करने का मौका मिला।
डा. जानस्ज कोर्जाक के लिए
जो डरे नहीं गाने से
पंक्ति के
अंत में
उन्हें मालूम था कि
क्या करना है
बच्चों को साथ लिए
बॉक्स कार से
निकलकर
वे चलते हुए
पहुंच गए गैस चैम्बर में
गाते हुए
दो औरतें, एक पियानो, एक घड़ी
शहर के छोटे से फ्लैट के
सामान से अटे एक कमरे में एक पियानो है
जब भी वह उसे बजाती हैं
घंटों याद करती हैं
स्कूल में ड्रिलिंग स्केल्स को
गांव में एक घड़ी है
जो एक छोटे से घर में बजती है
हर बार, जब वह कुर्सी पर चढ़ती हैं
घड़ी में चाबी भरने को
वह याद करती हैं सूअरों को
जिन्हें उसे खरीदना है
पालने के लिए।
घर वापसी*
1
जमीन उसे भूल गई है,
बच्चा ही तो था वह
जब घर छोड़कर गया, सेब का दरख्त
जिसे लगवाने में उसने मदद की थी
फलने को तैयार है, फिर से
करीब साठ फसलों के बाद,
उसके जाने के बाद की
आर्केड को भी याद नहीं कि
कितनी नाजुकता से
उसने जड़ों के पास की गंदगी
साफ की थी, और
झुककर टेढ़ी हुई डाल के करीब
हौले से मिट्टी थपथपाई थी
दरख्तों को याद हैं केवल कलियां
और उनका खिलना, फल
और फसल, फिर सर्दी के मौसम में
एक गहरी लंबी नींद
केवल उसे ही याद है उसकी
वह जो सबसे बूढ़ी है, बहुत कम बताती है
उसके काम से भरे लंबे दिन
काम, काम।
सेब झड़कर सड़ रहे हैं,
काम बढ़ गया है, चुनना और पकाना
आधे दिन तक आग सुलगाना,
फिर असंतुष्ट नींद।
2
सूरज पार चला गया
खेतों और आलुओं ने
सफेद मांसपेशियों को ढीला छोड़ दिया
गीले खेतों में।
3
मेरे पिता एक दूसरी जिंदगी को याद करते हैं
एक जो तंदूर में जला दी गई
एक जो जमीन में दफना दी गई
कौन शोक मनाता है यहूदियों के लिए?
भुला दिए गए लोग, विदेशी
जो ईसा को नहीं पूजते
लेकिन इंतजार करते रहे उनका
जब तक वे खुद ही मिट गए
मेरे पिता भी इंतजार करते हैं
सोचते हैं कि, काश वे भी यहीं रहते
और मर सकते उनके साथ
वे जो दुकानदार हैं,
लाल सिर वाली औरतें
और बच्चे, बतखें और बकरियां चराने वाले।
पोलैंड में
कैफ़े हैवेल्का, वियना
बॉडेलेयर के बाद
तुम्हें क्या लगता है कि तुम क्या कर रहे हो? तुम्हें क्या लगता है
कि तुम कौन हो? तुम इस कैफ़े में सिगरेट और वाइन पीते हुए
बेहोश और खुश होकर
कुछ स्लिवोविस शेयर करने वाले नहीं हो,
अपना गारंटीड स्टूडेंट लोन
मिटेलयूरोपा के टूर पर बर्बाद करने वाले नहीं हो। और वह क्राको की कोई उत्सुक
बड़ी आँखों वाली लड़की नहीं है, जो
इंग्लिश फिलोलॉजी पढ़ रही हो,
यहाँ इसलिए है क्योंकि
उसके पिता एक पार्टी के पदाधिकारी हैं,
जो विदेश घूमने का खर्च उठा सकते हैं। और वह
तुम्हें स्टूडेंट होटल में अपने ऊपर वाले बंक पर वापस बुलाने वाली नहीं है,
जिसे वह अपने इंग्लिश बोलने वाले दोस्तों के बैंड के साथ शेयर करती है
जो रॉक पर बात करने के लिए उत्सुक हैं।
ओह, मैं तुम्हें बहुत पसंद करता, ओह तुम भी जो यह जानते थे
क्रेडिट:
“कैफ़े हैवेल्का, वियना” मूल रूप से द ऑर्फियस कॉम्प्लेक्स में छपा था।
एक खत जो कभी भेजा नहीं गया
मैं समंदर से लगभग सौ किलोमीटर दूर एक कोने में रहती हूं, जो यूनाइटेड स्टेट्स के पश्चिमी किनारे पर है। मैंने नक्शे में देखा कि तुम चारों तरफ से बंद जमीन में रहते हो जो गिडिनिया और डेनिस्क बाल्टिक के बंदरगाह से काफी दूर है। इधर मैं खरपतवार की खुशबू से जागती हूं। कुछ दिनों से सूरज कोहरे में लिपटा हुआ है। टेलीफोन के खंभों के ऊपर कौए काँव-काँव कर रहे हैं। दुपहरी का पहला पहर है और गुलें हवा में लहराती हुई घर की छत से उड़ती निकल रही हैं। कभी-कभी सूरज ढलने के बाद रात गहराने से पहले ओलम्पिक के पिछवाड़े से बगुले पंख फड़फड़ाते हुए पश्चिम की ओर उड़ते हुए निकल जाते हैं। यहां घोंघिल पक्षी नहीं होते हैं। मेरी पक्षी वर्णन की किताब कहती है कि यह पुराने जमाने की प्रजाति है। तुम्हारी दुनिया, मेरे पिता की दुनिया पचास वर्ष पहले की याद रखती है। अभी हाल ही में मैंने नेशनल ज्योग्राफिक की किताब में पढ़ा है कि स्टार्क लुप्त होने के कगार पर है। क्या कभी तुमने सोचा कि क्या नहीं है? मौसम कैसा है? पिछली जुलाई में मिले आंटी के खत में मार्च के महीने में बाढ़ और फसल के नष्ट होने के बारे में लिखा था; हमने उस खबर को कई बार पढ़ा था, आखिरकार कुछ तो सूचना मिली। हालांकि खत खुला आया था। मैं वह सब नहीं लिख पा रही हूं, जो सोच रही हूं क्योंकि जानती नहीं कि क्या सच है, क्या नहीं। मैं खतों के माध्यम से रास्ता पकड़ लेती हूं, और कल्पना करने लगती हूं कि मैं बसंत से खराब हुई पहाड़ियों के ऊपर पुरानी बर्फ पर चल रही हूं। तुमने सर्दियों के लिए खाना जमा कर लिया ना? भंडार को प्याज और आलू से भर लिया ना? लाल और सफेद दोनों तरह के? बरनियों में कपूस्ता भर कर लटका लिया है ना? क्या अब भी तुम्हें मीट के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है? क्या अब लाइन लगती भी है कि नहीं? क्या अब कोई सुबह-सुबह उठकर नीले आसमान के नीचे धूप में कुकुरमुत्ते फैलाता है? और फिर चूल्हे के करीब रैक में रखकर सुखाता है? इन शब्दों के लिखे जाने तक, जिन्हें तुम कभी भी नहीं देख पाओगे। मैं कहना चाहती हूं कि मैं तुमसे प्यार करती हूं, पर तुम प्रश्नवाचक हो। एक पूरे साल जेल में रहने के बाद। वालेसा कहता है कि मुझे सावधान रहना चाहिए। मुझे सोचने के लिए वक़्त चाहिए। मैं उससे सहमत हूं, लेकिन मैं सब कुछ छोड़-छाड़ कर तुम्हारे दिल में पहुंचना चाहती हूं। भावों में बहना अच्छा लगता है, यदि इनका तुम्हारे विरुद्ध उपयोग किया जाए तो। पूरी जिंदगी मैं तुम्हारी ओर झुकी रही। तुम लुबलिन के दक्षिण में हो, गेलिशिया से ज्यादा दूर नहीं, चेज तोचावा से कई मील दूर पश्चिम में। मुझे मालूम है कि तुम कहां हो, पर नहीं जानती कि वहां तक कैसे पहुंचूं? नाम लेने में मन को आराम मिलता है, पर इतना ही तो काफी नहीं। मैं बचपन के दिनों को याद करते हुए उन खतों को याद करती हूं जिनमें विदेशी भाषा में कुछ लिखा था। उसका जवाब—अच्छे कच्छों का पैकेट, गरम जुराबें, नायलॉन, लिपस्टिक, टिन फूड, आदि। उसने सीटी बजाई मानों कि यह काम उसका हो। फिर उसने सफेद आटे की बोरी उन डिब्बों के चारों तरफ लपेट दी, और पुराने कपड़े से खाल की तरह कसकर बांध दिया। इसके बाद सुई लेकर अच्छी तरह से सी दिया; आधी उंगली रहित अकड़े हाथों से उसने स्याही की बोतल निकाली, जिसे उसने इसी काम के लिए सहेज कर रखा था, फिर स्याही में निब डुबोकर तुम्हारा पता लिख दिया। सफेद पर काले अक्षर, हर अक्षर ने जरूरत से ज्यादा समय लिया। मुझे लगता है कि मैं अपने बारे में लिखने की जगह उसके बारे में ज्यादा लिख रही हूं, किन्तु उसका प्यार तुम्हारे और मेरे प्यार के आसमान के बीच का पुल था। मैं और क्या कह सकती हूं, मैं एक अधेड़ औरत, एक लेखक, जैसा कि यहां जानी जाती हूं, तुमसे मोहब्बत करती हूं। पतझड़ करीब-करीब खत्म हो गया, और तुम्हारी और मेरी दुनिया सर्दी के मौसम में प्रवेश कर गई। जब तुम बेहद अंधेरे में क्रिसमस पर रोटी बांटोगे, मैं तुम्हें याद करूंगी।
मोर्स्की ओको लेक, जाकोपेन में
यह देश स्लेटी है
यहाँ तक कि आसमान नीला हो, तब भी
और आज तो बरस रहा है
धुंध अपने आप ही इकट्ठी हो जाती है
पहाड़ों को पकड़ती
शांत मुट्ठी
स्लेटी आदतों वाली ननें
स्लेटी चट्टानों पर चल रही हैं
झील की परिक्रमा करने को
क्या यह कुछ ज्यादा ही स्लेटी है
देखो, दरख्त हरे हैं
काई जमी जमीन इंतजार में है
निज़ापोमिनाकजी की छोटी नीली आँखें*
देख रही हैं
ननें चली गई हैं, केवल झील का किनारा
समुद्र की आँख दिखाई दे रही है
एक्वामरीन रंग के किनारे पर
ट्राउट मछलियाँ ठंडे पानी में
पूंछ हिलाती तैरती हैं
वही आसमान है
क्राको का तुरही वादन
मैं पोलिश के रूप में अपने सम्मान की शपथ लेता हूँ,
पोलिश राजा के सेवक के रूप में शपथ लेता हूँ
कौम के लोगों, मैं मरणपर्यन्त विश्वासयोग्य रहूँगा
यदि आवश्यकता हो, हेनाल की तुरही के साथ
सम्मान में आवाज उठाओ
उनके नाम पर चलते चर्च में
हर घंटे
अपनी लेडी के टावर में
आंटी
(वर्जिन मैरी का पर्व, 15 अगस्त)
1.
वे स्वर्ग चली गईं
अब वे कहाँ से हमारी
रक्षा करेंगी
वे धरती हैं
हमें कैसे भुला सकती हैं
कल रात
आधे चंद्र के नीचे
वे धुएं के साथ
ऊपर उठीं
पराली के अलाव ने
जल कर उनका
रास्ता रोशन किया
जब वे चाँद के
सामने से गुजरीं
उनकी परछाई पड़ी
यह सपना था
फेलिनो के खेतों में
दलदल पार कर
तीन स्त्रियाँ
मेरे पास आईं
मुझे एक प्रपात दिखाने के लिए
मैं पूरे दिन खोजती रही
हर पत्ती पर
हर लार्क चिड़िया में
2.
आंटी गुलदस्ते को सहेजती हैं
जो उनकी बहू ने बनाया था
चर्च में आशीष पाने के लिए
खसखस, जौ, बाजरा, डिल, डहलियास
शतावरी फर्न, पत्ता गोभी के पत्ते
डेज़ी, ग्लेडियोली, हरी फलियाँ,
गुलाब और फ़्लॉक्स का
जब गाय ब्याती है
सूखे फूल फिर से खिलकर
जल को मीठा कर देते हैं
मेरी के आशीष से थनों में दूध आता है
3.
सुअरिया और उसके दस बच्चे
बंद बाड़े में घूमते हैं
मैं कीचड़ और धूप में,
एक स्टूल पर बैठी हूँ
हम सब छुट्टी पर हैं।
बारिश के बाद
कैमोमाइल की गंध
सूअरों को निकालने के बाद
चर्च की धूप के समान मजबूत
सूअर आवाज करता है
तेज आवाज में
सूअर के बच्चे नन्हें-नन्हें खुरों पर
कीचड़ के बीच भागते हैं
उनकी तरफ।
4.
एक महिला सिर पर
सफेद स्कार्फ पहने
लाल पोशाक के साथ
उबड़-खाबड़ सड़क पर
चर्च की ओर जा रही है