रात जाने लगी तो आसमान बोला..शुभ यात्रा उसके शब्द सुनहरे रंगों में बदल गए तने ने मुस्कुरा कर सावन से पूछा.. कैसे हो? लाल पीले शब्द फूल बन
आशीष गौड़ गुफा के बाहर की कविताएक कविताजो भरे कमरे में अकेली है। एक मानिंद कविताजो ख़तरे में है,एक ऐसी कविताजिस पर तालियाँ नहीं बज रहीं। एक कविताजो
तिरुकुरल   दो हजार पुराने तिरुकुरल, दक्षिण भारत का वेद है। जिन्दगी को ना नकारते हुए, मानवियता को जीने की कला, इन कुरलों में निहित है। सप्त
लगन गरीब का रात्रिभोज पानी है नंगे पाँव,तारकोल की सड़क पर चलतेइधर-उधर भीख माँगते बच्चे।शीशा बंद,गाड़ी के भीतरठंडी हवा में सोया हुआ एक व्यक्ति।शीशा खटखटाकरउसे जगाया गया।“दे
रमेश कार्तिक नायक तेलुगु और अंग्रेज़ी से चयन एवं अनुवाद मट्टा प्रसाद बाबू गुलाबों की ज़मीन  माँ ने कहा था — "खेता मं मत जइयो रे
अजंता देव अजंता की इन कविताओं को मैंने उनके मुंह से बेहद अनौपचारिक काफी बैठक के दौरान ही सुना था। ये कविताएं न व्यक्तिगत पीड़ा की
कविता ने अनेक वीथियाँ पार की हैं, राजप्रकोष्ठों से लेकर साहित्यिक प्रकोष्ठों से होते हुए गली कूचों तक, लेकिन हम अक्सर उनसे संवाद करना भूल
श्री. तान्हाजी रामदास बोऱ्हाडे.हिंदी अनुवाद- स्वाती दामोदरे  १)पसीने की बारोमासी नदी किसने देखा हैआसमान से धरतीपर गंगा उतारने वालेपुराणकथाओ के भगीरथ को ?मैने अपनें बचपन से देखा
नवरात्रा हमारी प्राथमिकता हमारी प्राथमिकतावो रोज़ सबसे पहले उठकरसूरज को जगाती है,सबके लिए अलग-अलगनाश्ते बनाती है,दौड़-भागकर घर के सारे काम निपटाती है,फिर चाँद को पहरेदार बनाकरसबसे आखिरी
प्रताप नारायण मिश्र   प्रताप नारायण मिश्र मूलतया गद्यकार के रूप में प्रसिद्ध हैं, किन्तु आपकी काव्य शक्ति भी अपने समय की कसौटी पर खरी उतरती है।