लगन गरीब का रात्रिभोज पानी है नंगे पाँव,तारकोल की सड़क पर चलतेइधर-उधर भीख माँगते बच्चे।शीशा बंद,गाड़ी के भीतरठंडी हवा में सोया हुआ एक व्यक्ति।शीशा खटखटाकरउसे जगाया गया।“दे
श्री. तान्हाजी रामदास बोऱ्हाडे.हिंदी अनुवाद- स्वाती दामोदरे १)पसीने की बारोमासी नदी किसने देखा हैआसमान से धरतीपर गंगा उतारने वालेपुराणकथाओ के भगीरथ को ?मैने अपनें बचपन से देखा
नवरात्रा हमारी प्राथमिकता हमारी प्राथमिकतावो रोज़ सबसे पहले उठकरसूरज को जगाती है,सबके लिए अलग-अलगनाश्ते बनाती है,दौड़-भागकर घर के सारे काम निपटाती है,फिर चाँद को पहरेदार बनाकरसबसे आखिरी