प्रिय कवि

जुआना एम. रामोस JUANA M. RAMOS

 

अनुवादक : बृजेश सिंह

 

 

बहादुर शहर

 

बहुत दूर, यह शहर,
मेरे लिए अपरिचित, अपनी रगों में
दौड़ती भीड़ के बारे में
डींगें हांकता है।
इमारतों की कतारें
बैरिकेड के ठीक मध्य में
सूरज की राह रोकती हैं।
फुहार मेरे कटे हुए बालों को
भिगोने को तैयार है,
किरणें मुझसे पार जा रही हैं,
और मैं तुम्हारे बारे में विचारने लगती हूँ,
ग्रिड पर तुम्हारे केंद्र के बारे में,
तुम्हारे मद्धम लैंप-पोस्ट
और तुम्हारी गलियों के बारे में,
एक मात्र, वो दुर्गम सड़क
जहाँ सूरज सैर करता है
उस पथरीली राह पर।
जिन्होंने तुम पर नीची नज़रें डालीं,
उन्हें दिखा दो
अपना दंतविहीन मुख
और बता दो कि तुमने अपने नुकीले दांत गंवा दिए
चबाते हुए: मालिक की पीटने वाली छड़ी को,
तुम्हारी ज़मीन हड़पने वाले ज़मींदारों को,
तुमने स्वयं को पोस्टरों से ढक कर
विशाल धरना-प्रदर्शनों में
डटकर विरोध किया,
कि बूट और बंदूक
साल-दर-साल तुम्हारी रातों पर हावी रहे,
सड़क किनारे बनी नालियों में जमा हुआ
तुम्हारे बच्चों का रक्त
और तुम्हारे बच्चों के बच्चों का रक्त,
वो रक्त जो बारम्बार उबाल मारता है।

 

इंतज़ार

 

वे कहते हैं कि उस दिन
तुम बहुत जल्दी जाग गई थीं
मन में अपनी छोटी बच्ची की स्मृतियां लिए।
तुमने माँग की, अपनी नई ड्रेस की,
मेक-अप की,

 

लिविंग रूम में बैठकर
तुमने इंतज़ार को
अपनी बाहों में थामे रखा।
“उसने वादा किया था कि वो आएगी,
उसने आज सवेरे ही फ़ोन किया था,”
तुमने उनसे कहा।

 

लेकिन तुम्हारी छोटी बच्ची
दूसरी राहों पर चल पड़ी है
दूसरी भाषाओं में बतियाती है,
पकड़ती है: बसें,
सबवे,
हवाई जहाज़

 

जो उसे तुम्हारे इंतज़ार से दूर करते हैं।
दफ़्तर समय उसे निगले जाता है,
हर उगते सूरज संग वो मरती जाती है,
हर रोज अलार्म घड़ी
उसे हुक्म देती है
“उठ जाओ और चल पड़ो।”
किसी किसी दिन वो अपना सिर छिपा लेती है,
और कभी तूफ़ानों की मार से
उसके रंग फीके पड़ते जाते हैं।

 

तिल-तिल उसे शहर
निगले जाता है,
उसका नाम तक खराब हो गया है।
वो अपनी राह भटक गई है
और अब उसे खोज नहीं पा रही।

 

मरहम

 

हाथ लिख रहा है
दुख की दास्तान
अपनी प्रेयसी की सूरत पर,
मुट्ठी भींचकर
वह बनाता है
दिखावटी
घाव।
बाद में, पश्चाताप में डूबा
वह स्वयं को एक कविता में
लीन कर लेता है
और उसे भेंट करता है
अपने सबसे बेहतरीन रूपक
(उसकी प्रेयसी उन रूपकों में
स्वयं को तलाशने की कोशिश कर रही है),
आत्मग्लानि कम करने का
एक असरदार मरहम।

 

 

जुआना एम. रामोस (सांता ऐना, एल साल्वाडोर) यॉर्क कॉलेज, सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यूयॉर्क (CUNY) में स्पेनिश और साहित्य की प्रोफ़ेसर हैं। बहुमुखी प्रतिभा की धनी रामोस के कई कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें क्लेमेंटिना, मल्टीप्लिकाडा एन मी और ऊना कन्वर्सेशन पेंडिएंटे प्रमुख हैं। उनकी रचनाओं का अंग्रेज़ी, फ्रेंच, इटैलियन और चीनी सहित अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ है। उन्हें CUNY के ‘फ़ेलिक्स ग्रॉस अवॉर्ड’ (2021) और एल साल्वाडोर में ‘पोएट ऑफ़ द ईयर’ (2023) जैसे सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है। उन्होंने 2020 में EntreTmas के ज़रिए एक कल्चरल इनिशिएटिव शुरू किया, जो एक डिजिटल मंच है जहाँ वह U.S., लैटिन अमेरिका और स्पेन में रहने वाली महिला लेखिकाओं का इंटरव्यू लेती हैं और उन्हें प्रमोट करती हैं। इसके अलावा, वह ब्राज़ीलियन कवि, ट्रांसलेटर और निबंधकार फ्लोरियानो मार्टिंस के साथ Colección Libros Imposibles को डायरेक्ट करती हैं। वह इंटरव्यू प्रोग्राम कैनन एंड फुगा की होस्ट और को-प्रोड्यूसर भी हैं, जिसे वह कोलंबियाई राइटर डेविड ट्रोनकोसो के साथ को-डायरेक्ट करती हैं।

 

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