मौला रहम करे गुजरे साल की पगडन्डी पर चलते फटी एड़ी वाले कदमों पे कदमों के नीचे तलवों के छालों पर रसोई में टनटनाते बासनों पर किसान के खेत में
जितेन कुमार दास   फातिमा शेख   चारदीवारी में क़ैद एक पूरी सदी की चुप- जहाँ लड़कियों की किताबें सिर्फ़ कुरान की आयतों तक सीमित थीं, और धूप भी परदों को चीर अंदर आने
'मान्योशु' जापानी कविता अनुवाद और टिप्पणी‍-रीतारानी पालीवाल उचित के विस्तृत समतल इलाके मेंआगे बढ़ते घोड़ों की कतारभोर की इस बेला में-सोचती हूँ वे घोड़े की पीठ पर
गोपाल माथुर एक पीड़ा की नीली देह सौंपती अपने दुःख किसी अदेह वनचर को दीवारों पर से रिसते रहते पुराने घाव जैसे किसी खण्डहर के पत्थरों के बीच बह रहा हो लहू इ ति हा स बन कर कहाँ से
मृदुला गर्ग एकान्त नहीं कोरोना काल में मुझे एकान्त की आदत हैमुझे एकान्त प्रिय हैएकान्त में स्मृति जगती हैबेआहट,बेआवाज़ऐसे कैसे आ जाता प्रेमीनिःशब्द अचानक पासइतने कितने चुम्बन
गिर्मी सेर्पा की कविताएँ अनुवाद -बिर्ख खडका डुबर्सेली     गिमी सेर्पा सिक्किम के लोकप्रिय कवि हैं। गंगटोक का प्राकृतिक सौन्दर्य किसी भी भावप्रवण व्यक्ति को कवि बनाने का
मराठी कविता हर्षदा सुंठणकर हिंदी अनुवाद- डॉक्टर स्वाती दामोदरे   १)कपड़े सुखाती औरत   शामिल रहता है औरत का कमाल का व्यवस्थापन कपड़े सुखानें जैसे छोटेसे काम में भी   वह कपड़े उल्टे कर वैसे
देवेन्द्र आर्य   घर ---- लौटूंगा बार बार लौटूंगा   लौटने के लिए ही होता है घर घर न हो तो लौटना कहाँ? लौटना न हो तो जाना कहाँ?   एक घर ही तो है जहाँ से
कुमार विश्वबंधु   1.   कुँवारी लड़की के हाथ में जलती हुई सिगरेट   कुँवारी लड़की के हाथ में जलती हुई सिगरेट तुम्हारी सभ्यता के चक्रव्यूह में उसे दी गयी तमाम असभ्यताओं के खिलाफ एक जलता हुआ
प्रिय मित्रों वर्ष का अन्त है, कृत्या ने पूरे बीस साल पूरे कर लिए। बहुत बार लगा कि यह यात्रा रोकनी चाहिए, लेकिन मेरा दुनिया भर