कवि अग्रज

विस्लावा शिम्बोर्स्का (Wislawa Szymborska)

 

सभी कविताओं का अनुवाद रति सक्सेना
पोलिश डायस्पोरा की कविता नामक पुस्तक में संकलित

 

विस्लावा शिम्बोर्स्का दूसरी पोलिश साहित्यकार हैं, जिन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था। उनका जन्म 2 जुलाई 1923 को Bnin में हुआ था। उन्होंने बाल्यकाल से ही लिखना आरंभ कर दिया था। उनकी कविताओं को किसी एक श्रेणी में नहीं बांधा जा सकता है, लेकिन वे मानवता संबंधी विषयों से सरोकार रखती थीं। उनकी भाषा में सहजता थी, और मानवीयता के साथ आध्यात्मिकता उनकी कविताओं की विशेषता रही है।

 

घर लौटना

 

हालांकि

 

वह घर लौट आया। कुछ कहा नहीं।

 

हालांकि, यह स्पष्ट था कि कुछ गलत हुआ था।

 

वह कपड़े पहने ही लेट गया।

 

सिर तक कंबल खींच लिया।

 

घुटनों को ऊपर कर लिया।

 

वह लगभग चालीस का है, लेकिन इस समय वह वैसा ही है

 

जैसे वह अपनी माँ के गर्भ में था,

 

त्वचा की सात दीवारों में, आश्रययुक्त अंधेरे में।

 

कल वह व्याख्यान देगा

 

मेटागैलेक्टिक कॉस्मोनॉटिक्स में होमोस्टैसिस पर।

 

हालांकि अभी वह शिशु अवस्था में सो रहा है

 

 

लिखने का आनंद

 

यह लिखित हिरणी जंगल से क्यों बंधी है?

 

एक झरने से लिखित पानी पीने के लिए

 

उसकी नरम थूथन किस सतह का ज़ेरॉक्स करेगी?

 

उसने सिर क्यों उठाया, क्या कुछ सुना?

 

सच से उधार ली गई चार पतली टांगों पर बैठी है वह,

 

वह मेरी उंगलियों के पोरों पर अपने कान लगाती है

 

मौन – यह शब्द भी पूरे पन्ने पर सरसराता है

 

और जंगल में फूटी नई टहनियों से

 

अलग कर देता है।

 

इंतज़ार में बैठी हुई, खाली पन्ने पर झपटने

 

को तैयार,

 

क्या अक्षर ठीक नहीं हैं?

 

उपवाक्यों का बंधन वश में

 

वे उसे दूर नहीं जाने देंगे।

 

स्याही की प्रत्येक बूंद में शिकारियों की उचित आपूर्ति होगी

 

जो अपनी तिरछी निगाहें रखते हैं,

 

जो किसी भी क्षण कलम पर हमला करने को तैयार हैं,

 

हिरणी को घेर लें और धीरे-धीरे अपनी बंदूकों पर निशाना साधें।

 

वे भूल जाते हैं कि यहाँ जो है, वह असली ज़िंदगी नहीं है

 

दूसरे कानून, सफेद पर काला पाते हैं

 

आँख की चमक भी उतना वक़्त लेगी, जितना मैं चाहूँ

 

मैं चाहूँ तो अनंतता को विभाजित कर सकता हूँ

 

एक बार मैंने चलती हुई गोली को बीच में रोक दिया

 

मेरे चाहे बिना कुछ नहीं हो सकता है

 

मेरे आशीर्वाद के बिना एक पत्ता भी नहीं गिरेगा,

 

उस छोटे खुर के पूर्ण विराम के नीचे

 

घास का एक तिनका भी नहीं झुकेगा।

 

क्या ऐसी दूसरी दुनिया है जहाँ

 

मेरा राज चल सकता है?

 

क्या किसी समय में चिह्नों के हस्ताक्षर से बंधा था?

 

मेरे कहने पर क्या कोई अस्तित्व

 

अनंत हो जाता था?

 

लिखने का आनंद।

 

संरक्षण की शक्ति।

 

एक नश्वर हाथ का बदला है

 

(एस. बारान्ज़क और सी. कैवनघ द्वारा पोलिश से अंग्रेजी में अनूदित)

 

 

 

आदर्शलोक

 

एक ऐसा द्वीप जहाँ

 

सब कुछ स्पष्ट हो

 

पैरों के नीचे

 

ठोस ज़मीन हो

 

मात्र वे ही सड़कें हों जो

 

जो कहीं पहुँचा सकें

 

सबूत बताने के लिए

 

झाड़ियाँ झुक जाएँ

 

वैध अनुमान वाले वृक्ष उगें

 

जिनकी शाखाएं अनादि काल से

 

उलझी हों

 

समझदारी का वृक्ष,

 

बिल्कुल सीधा और सरल,

 

वसंत ऋतु में उगने वाले अंकुरों को

 

नाउ आई गेट इट कहा गया हो

 

घने जंगल,

 

दृश्य उतने ही विशाल

 

स्पष्ट घाटी।

 

यदि कोई संदेह हो तो

 

हवा तुरंत दूर कर दे

 

प्रतिध्वनियाँ बिना बुलाए

 

गूँजें, दुनिया के रहस्यों को समझाएँ

 

दाहिनी ओर एक गुफा है

 

जहाँ अर्थ निहित हैं।

 

बाईं ओर डीप कन्विक्शन झील।

 

सत्य नीचे से टूटता है

 

और सतह पर आ जाता है।

 

अटल आत्मविश्वास वाली घाटी

 

पर हावी हो, शिखर से

 

बेहतरीन दृश्य दिखाई देते हों

 

अपने सभी आकर्षणों के बावजूद,

 

यह द्वीप निर्जन रहे,

 

और उसके समुद्र तटों पर

 

पैरों के हल्के-हल्के निशान

 

बिना किसी अपवाद के समुद्र की ओर

 

मुड़े हों

 

जैसे कि आप यहाँ केवल छुट्टी मना सकते हैं

 

और गहराई में डूब जाएँ

 

कभी नहीं लौटने के लिए

 

अथाह जीवन में।

 

(एस. बारान्ज़क और सी. कैवनघ द्वारा पोलिश से अंग्रेजी में अनूदित)

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