मेरी पसन्द

 

 

 

 

 

 

 

 

 
एडिना बर्ना की कविताएं
 

 

मेरी बेकरी

 

रात पिछली मैं तंदूर में थी
जहां धीमे- धीमे सिंक रही थी रोटी
ये तपती हुई रोटियाँ
सोती रहीं मेरे सीने पर और
उनकी कराहती सांसों ने
मेरी गर्दन और मेरी आत्मा को छुआ
मैं बस सस्वर प्रार्थना करती रही।

हिन्दी अनुवाद – अपर्णा अनेकवर्णा

 

प्रातः विचार आईना के

 

सिर्फ खुद को तलाश रहे हैं सब
मैं भी और तुम भी
मैं खुश हूं
तुम में पा लिया खुद को
और तुम खुद से मिले मुझ में

 

हिन्दी अनुवाद – मनि मोहन मेहता

 

रजत-रेख

 

वो नील-नीले पर्वत
जनमतीं हैं जहाँ नदियां
वो धरे हुए हैं उत्तर
बहुत लम्बे समय से
मैंने दे ध्यान खूब सुना है
उनका वो रजत मौन
वो समझते हैं सब
देखा जो है उन्होंने
सब समय के शुरू से
वो हैं
आकाश से
निकटतम

 

हिन्दी अनुवाद -अपर्णा अनेकवर्णा

 

संशय

 

अति वास्तविक है ये
अति सांसारिक भी
नहीं है ये चंद्रमा पर चलने सा
ना ही एक सींग वाले अश्व के दौड़ने सा
मैं ढूंढ़ती हूं आत्मा की छुपी धुनों को
प्रत्येक स्नायु को बांधती हैं जो
मैं करती हूं विश्वास परीकथाओं में और नियति में भी
पढ़ती हूं पहुंच की परिधि से बाहर की लहरों को
देखना चाहती हूं उन आंखों की चमक
छूना चाहती हूं उन बरौनियों को
पर ये सब अति वास्तविक ही है
अति सांसारिक भी

 

हिन्दी अनुवाद -अपर्णा अनेकवर्णा

 

मैं कोट थी तुम्हारी

 

मैं सर्दी के उन ठंडे दिनों की तुम्हारी कोट
तुमसे पूरी तरह लिपटी, उन्मुक्त
फिर एक बार, बसंत के किसी एक दिन
जल उठी मैं, जल गई मैं
जिंदगी पहले से अधिक प्रिय हो गई।
तब से कुछ महीने बाद
दुष्ट-आत्मा हवाओं ने कई बार सिसकारी मारी
इस जरा से बचे चिराग
को बुझाने की
ठंडी हवाओं से जो संघनित हो गई
और जिंदगी का जादुई रंग वापस लौट आया!

 

हिन्दी अनुवाद – आदित्य शुक्ला

 

बैंगनी गुलाब

 

मेरे बगीचे में है बैंगनी गुलाब
मेरी आत्मा में है बैंगनी गुलाब
मीठी सी खुशबू देता है बैंगनी गुलाब
कभी चोट देता है, कभी गले से लिपट जाता है
बैंगनी गुलाब ठीक एक मुक्त पक्षी सा
बैंगनी गुलाब तोड़ता है सब नियम कायदे
बैंगनी गुलाब स्वार्थी है
बैंगनी गुलाब प्रेम का निषेध करता है
पर अगर मरना है मुझे एक दिन
मैं डूब के मरना चाहती हूँ बैंगनी पंखुड़ियों में !

 

हिन्दी अनुवाद – दिनेश चरन

 

वह समय

 

महसूस कर रही हूं मैं
समय का बीतते जाना
जैसे कि बढ़ते हुए पेड़ों की होती हैं
बड़ी और बड़ी होती जाती छाया

हिन्दी अनुवाद -अपर्णा अनेकवर्णा

 

सपनों की नियति

 

इंद्रधनुषीय रंगों के, थमे से
तुम्हारी पलकों पर उगे हुए
पर पहली ही जागी सांस
फूंक कर उड़ा देती है उन्हें और
तुम हड़बड़ाए प्रयोजन करते हो लपकने का उन्हें
बचे हुए कुछ एकरंगे
तुम्हारी सूखी आंखों में छाया आकृति बन जाते हैं

 

हिन्दी अनुवाद -अपर्णा अनेकवर्णा

 

उलझन

 

भ्रम है जागरण .
ख़ामोशी गरज रही है ज़ेहन में .
मैं महसूस करना चाहती हूँ वास्तविक अस्तित्व की मौज़ूदगी
परन्तु सिर्फ़ फ़ासलों का धुंआ ही ले सकती हूँ साँसों से .

 

हिन्दी अनुवाद – मनि मोहन मेहता

 

सोने नहीं देती

 

चूक जाती हो
खोल नहीं पाती शीशी इत्र की
छुपा नहीं पाती सब्ज़ ख़ुशबू हिना की
कल से बसी है जो बालों में तुम्हारे
वो तुम्हें सोने भी तो नहीं देती..
चुनती हो एक और लंबी दुशाला.. कंबल कोई
कि शीत तुम्हारे कंधों पर ही मार चौकड़ी जम न जाए
जब तुम उसकी आदिम कथाएँ सुन रही होती हो

 

हिन्दी अनुवाद -अपर्णा अनेकवर्णा

 

अरुणोदय

 

ले लो मुझे अपनी ख़ामोशी के आगोश में
अपनी साँसों में छुपा लो मुझे
और यह पूरी काइनात जी उठेगी
तुम्हारी साँसों की खुशबू में ।

 

हिन्दी अनुवाद – मनि मोहन मेहता

 

श्याम रात्रि – श्वेत रव


सुदूर, गहराई में
श्याम रात्रि के सत की
चमकते हैं सकुचाते तारक
बस निहारती हूं मैं
उस श्वेत रव को
जो उभर रहा है धीमे धीमे
और संदेश एक
अनवरत हो रहा है
गुंजायमान विगत से
है अब भी मेरी कथा
रहस्य एक, पर उसकी कथा
तो अब इतिहास हो चुकी है

 

हिन्दी अनुवाद -अपर्णा अनेकवर्णा

 

 

बाद में

 

देर हो चुकी होगी बहुत
चाय भी ठंडी कड़वी हुई होगी

तुम मुझे और मैं तुम्हें
हम धरेंगे दोष एक दूसरे पर
पर लौट आएंगे उसी एक प्याली तक
लेने चुस्की पर चुस्कियां

 

हिन्दी अनुवाद -अपर्णा अनेकवर्णा

 

 

हिलना मत.. मैं इस क्षण को बचाए रखना चाहती हूं

 

वो पार्क की लाल बेंच
बच्चों संग बतियाती माएं
एक अधेड़ पुरुष कुत्ता टहला रहा है
हम यहां से उसकी दोनों कनपटियां देख सकते हैं
उस पहाड़ी की चोटी
जहां हमने कभी दोपहर का भोजन किया था
कुछ लड़के उसी पहाड़ी पर बैठे हैं
कड़ुवा धुआं उपरा रहा है वहीं से
एक खोमचेवाला धीरे- धीरे इधर बढ़ रहा है
आवाज़ उसकी क्रमशः बढ़ रही है
एक बच्ची रो पड़ती है
उसकी बड़ी बहन उसे बहलाने लगी है
एक बार फिर हवाईजहाज़ आ रहा है
ठीक पीछे यहीं कहीं हवाई अड्डा है
वसंत और फूल हैं हर तरफ़
पथरीली सड़क कष्टदाई है
अविश्वसनीय तरह से समय बीत रहा था
मेट्रो स्टेशन के पास
साथ तुम्हारे वो कुछ अंतिम क्षण
जब मैंने कहा था, ‘ लौट आऊंगी! ‘

 

हिन्दी अनुवाद -अपर्णा अनेकवर्णा

 

एक कलाकार का जन्म या गर्भावस्था के निशान

 

और उसके अजन्मे शिशु ने
गर्भ के भीतर से
चित्रित किया जीवन का दरख़्त
पेट की त्वचा पर
यह पहली कलाकृति थी
इस मानवीय सत्ता की ।

 

हिन्दी अनुवाद – मनि मोहन

 

 

एडिना बर्ना मूलतया हंगेरिया की निवासी हैं, कलाकार, कवि हैं, वे कृत्या से 2012 से जुड़ी हैं। एडिना की कविताएं भावों के उस रेख का स्पर्श करती हैं, जिसका कविता जगत से ह्रास हो गया है। एडिना की कविताएं मौलिक हैं, और आत्ममंथन और आत्मानुभूति से उपजी हैं। वे अधिकतर अंग्रेजी में लिखती हैं। सभी अनुवादक अच्छे कवि भी हैं, इसलिए अनुवाद भी सुन्दर हुआ है।

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