मेरी बात

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मेरे पास सवाल यह है कि कविता मेरी बात कह रही है, या मुझे कविता की बात कहनी है। हालांकि पत्रिका में प्रकाशित कविताएं, या कविता संबन्धी उद्गार सहयोगी कवियों के हैं, लेकिन कविता का रस तो एक ही होगा नहीं न? न ही एक स्वर।

कविता का बहाव, काल और समय के सापेक्ष होता है। कृत्या वर्षों से कविता के इर्द- गिर्द घूम रही है, यदि सभी अंको को एकत्रित किया जाए तो महाभारत सा ग्रन्थ तैयार हो जाएगा, फिर भी कविता के पास हमेशा कुछ नया कहने को होता है।

इस अंक में विश्व के महान कवि जैक हिर्शमैन को कृत्या के हिन्दी विभाग के संपादक बृजेश नें अनूदित किया है।

समकालीन कविता में बेहद जहीन युवा कवि की रचनाएं हैं, विशाखा मुलमुले, अजय दुर्ज्ञेय, सौरभ राय। संपादकीय पसन्द में युवा कवि विवेक चतुर्वेदी की कविताएं प्रस्तुत हैं। कविता के बारे में आनन्द खत्री कविता सुनने की कला में बेहद रोचक वक्तव्य दे रहे हैं।

आशा है कि पाठक इस अंक को पसन्द करेंगे

शुभकामनाएं

रति सक्सेना

Post a Comment